अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिन्दुखत्ता 👉
बिंदुखत्ता पर आर-पार की लड़ाई: 27 सितंबर को रैली, मुख्यमंत्री या समकक्ष प्रतिनिधि से लिखित आश्वासन की मांग
बिंदुखत्ता। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर वन अधिकार संगठन का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पदयात्रा अभियान के 28वें दिन तिवारी नगर स्थित वनदेवी मैया मंदिर से हाट कालिका मंदिर तक पदयात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों महिला-पुरुष ग्रामीण शामिल हुए। लोकगीतों और जनगीतों के जरिए ग्रामीणों से 27 सितंबर को प्रस्तावित विशाल रैली एवं जनसभा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया गया। पदयात्रा का रात्रि विश्राम हाट कालिका मंदिर में हुआ। 12 सितंबर की सुबह 8 बजे पदयात्रा अगले पड़ाव के लिए रवाना होगी।
पदयात्रा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाए जाने की मांग को लेकर ग्रामीण पिछले 40–50 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन हर बार आश्वासन देकर मांग को टाल दिया जाता है। वक्ताओं ने कहा कि बिंदुखत्ता देश का अनोखा उदाहरण है, जहां लोकसभा और विधानसभा के चुनाव तो होते हैं, लेकिन ग्रामीणों को अपनी ग्राम पंचायत चुनने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मांग सिर्फ राजस्व ग्राम की अधिसूचना तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्व ग्राम का दर्जा, पंचायती राज व्यवस्था और भूमि पर मालिकाना अधिकार उनके मूल अधिकारों से जुड़े सवाल हैं।
डीएम कैंप कार्यालय पहुंचा प्रतिनिधिमंडल, सौंपा अनुमति पत्र
पदयात्रा के बाद वन अधिकार संगठन एवं पूर्व सैनिक संगठन के करीब 60–70 लोगों का प्रतिनिधिमंडल हल्द्वानी स्थित जिलाधिकारी कैंप कार्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने 27 सितंबर को प्रस्तावित विशाल रैली एवं जनसभा की अनुमति के संबंध में पत्र सौंपते हुए कार्यक्रम की जानकारी दी।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि 27 सितंबर की रैली में इस बार कोई नया ज्ञापन नहीं दिया जाएगा। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया है कि रैली में स्वयं मुख्यमंत्री अथवा उनके समकक्ष जिम्मेदार प्रतिनिधि उपस्थित होकर बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम के मुद्दे पर चर्चा करें और लिखित आश्वासन दें, तभी रैली समाप्त की जाएगी।
संगठन ने चेताया कि यदि निर्धारित समय-सीमा में सरकार की ओर से कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचता है तो रैली को क्रमिक अनशन में बदलने का निर्णय लिया जा सकता है। इससे साफ है कि आंदोलनकारी अब केवल आश्वासनों के बजाय सरकार से ठोस और लिखित कार्रवाई चाहते हैं।
जिलाधिकारी को पत्र सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में संगठन अध्यक्ष उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, बलवंत बिष्ट, कैप्टेन इंद्र सिंह पनेरी, रमेश गोस्वामी, दीपक जोशी, दीपक नेगी, दीपक रौतेला, कविराज धामी, संध्या डालाकोटी, मीना कपिल, हीरा सिंह बिष्ट, कैप्टेन प्रताप सिंह बिष्ट, सूबेदार खुशाल सिंह कोश्यारी, सूबेदार माधो सिंह अरमोली, सूबेदार कमल सिंह बिष्ट, सूबेदार बलवंत सिंह बिष्ट, बसंत पांडे, दीपक पांडा, नंदन बोरा, राजेंद्र पांडा, गंगा सिंह दानू, मीना मेहता, रेखा कार्की, नारायण सिंह कोरंगा, बलवंत परिहार, गंगा देवी, लीला देवी, गोपाल नेगी, भवान सिंह कठायत, ममता दानू सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

