अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉
बेस अस्पताल की करोड़ों की बिल्डिंग बनी सफेद हाथी
करोड़ों की बिल्डिंग पर काई, चार साल से ताला! बेस अस्पताल में सरकारी बजट की ऐसी बर्बादी क्यों?
हल्द्वानी। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये किस तरह लापरवाही की भेंट चढ़ रहे हैं, इसका उदाहरण हल्द्वानी के बेस अस्पताल परिसर में सामने आया है। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से तैयार तीन मंजिला नई बिल्डिंग चार साल से ताले में बंद पड़ी है। इस्तेमाल न होने के कारण अब भवन की दीवारों पर सीलन और काई जमने लगी है और सरकारी धन से तैयार की गई इमारत धीरे-धीरे बदहाल होती जा रही है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2022 में बिल्डिंग की रंगाई-पुताई कर इसे तैयार कर दिया गया था, लेकिन चार साल बीतने के बावजूद इसका उपयोग शुरू नहीं हो सका। सबसे हैरानी की बात यह है कि निर्माण के दौरान बिल्डिंग के लिए सीवर सिस्टम की समुचित व्यवस्था तक नहीं की गई। इसी तकनीकी कमी के चलते भवन अब तक अस्पताल प्रशासन को हैंडओवर नहीं किया जा सका है।
बिल्डिंग तैयार, लेकिन व्यवस्था अधूरी
अस्पताल प्रशासन के अनुसार भवन निर्माण का काम मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल के स्तर से कराया गया था। भवन में सीवर लाइन समेत कई खामियां सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि करोड़ों रुपये खर्च कर भवन तैयार करने से पहले मूलभूत सुविधाओं और तकनीकी जरूरतों का आकलन आखिर किस स्तर पर किया गया?
एक तरफ नई बिल्डिंग बंद पड़ी है, वहीं दूसरी ओर बेस अस्पताल में तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों को पुराने, सीलन भरे और जर्जर कमरों में रहने की परेशानी झेलनी पड़ रही है। यानी जिस भवन से अस्पताल को अतिरिक्त सुविधा और राहत मिलनी चाहिए थी, वह खुद चार साल से बदहाली का शिकार हो रहा है।
किसकी जिम्मेदारी, कौन देगा जवाब?
मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से शासन और उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट करने और समस्या का समाधान कराने का अनुरोध किया गया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि भवन में सीवर लाइन नहीं होने के साथ कई खामियां हैं। मरम्मत और आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद भवन हैंडओवर हो जाए तो अस्पताल को काफी राहत मिल सकती है।
पीएमएस बेस अस्पताल हल्द्वानी डॉ. एमके तिवारी के अनुसार, भवन निर्माण का कार्य मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल के स्तर से हुआ था। सीवर लाइन सहित अन्य खामियों को लेकर सीएमओ और डीजी हेल्थ को पत्र लिखा गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि चार साल तक करोड़ों की लागत से बनी बिल्डिंग बंद क्यों रही? निर्माण के समय सीवर सिस्टम जैसी बुनियादी व्यवस्था क्यों नहीं की गई? भवन की जिम्मेदारी किस निर्माण एजेंसी की है और सरकारी धन की इस कथित बर्बादी के लिए जवाबदेही आखिर तय कब होगी?
बेस अस्पताल की यह तस्वीर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है—जरूरत अस्पताल को नई सुविधा की थी, लेकिन करोड़ों की बिल्डिंग खुद ही सफेद हाथी बनकर रह गई।

