ललित मोहन रयाल की सख्ती: इंस्पिरेशन स्कूल समेत 17 निजी विद्यालयों को नोटिस, महंगी किताबों और अवैध शुल्क पर कार्रवाई

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉 बिन्दुखत्ता 👉 कुमाऊं 👉 📰
ललित मोहन रयाल के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई: 17 निजी स्कूलों को नोटिस, महंगी किताबों और अवैध शुल्क पर सख्ती
हल्द्वानी/नैनीताल, 2 मई 2026।
जनपद नैनीताल में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और अभिभावकों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने हल्द्वानी, रामनगर और भीमताल क्षेत्र के 17 निजी विद्यालयों को नोटिस जारी किया है।


प्रशासन द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई निजी विद्यालय एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अलावा महंगी निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य कर रहे हैं। इससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इसके साथ ही कुछ स्कूलों द्वारा अभिभावकों को विशेष दुकानों से ही किताबें और शैक्षिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायतें भी मिली हैं।
🏫 इन विद्यालयों को जारी हुआ नोटिस
कार्रवाई के दायरे में आए प्रमुख विद्यालयों में देवभूमि सीनियर सेकेंडरी स्कूल मानपुर पश्चिम, गुरु द्रोणा पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, लक्ष्य इंटरनेशनल स्कूल, बीएलएम एकेडमी, वुडब्रिज स्कूल भीमताल, मल्लिकार्जुन स्कूल, सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल पीरुमदारा (रामनगर), ग्रेट मिशन पब्लिक स्कूल, गार्डन वैली पब्लिक स्कूल, आर्यमन विक्रम बिड़ला स्कूल, दून पब्लिक स्कूल नवाबी रोड, विस्डम पब्लिक स्कूल, इंस्पिरेशन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, एसकेएम स्कूल, किंग्सफोर्ड स्कूल, शेमफोर्ड स्कूल मोटाहल्दू और हिमालया विद्या मंदिर शामिल हैं।
⚠️ जांच में सामने आई प्रमुख अनियमितताएं
जिला प्रशासन की जांच में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं—
एनसीईआरटी के अतिरिक्त महंगी निजी पुस्तकों को अनिवार्य करना
कई कक्षाओं में किताबों की संख्या दो से तीन गुना तक अधिक
निश्चित दुकानों/विक्रेताओं से खरीदारी के लिए दबाव
स्कूल वेबसाइट पर आवश्यक जानकारी का अभाव
इन अनियमितताओं को राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009, सीबीएससी दिशा-निर्देश और कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 का उल्लंघन माना गया है।
📌 सीईओ के सख्त निर्देश
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों को 15 दिन के भीतर निम्न निर्देशों का पालन करने को कहा है—
संशोधित बुक लिस्ट जारी करें
केवल आवश्यक और एनसीईआरटी आधारित पुस्तकों को प्राथमिकता दें
किसी भी दुकान/वेंडर की अनिवार्यता समाप्त करें
वेबसाइट पर बुक लिस्ट और फीस संरचना सार्वजनिक करें
अतिरिक्त वसूली गई राशि का समायोजन या रिफंड करें
🚨 नहीं माने तो होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्देशों का पालन न करने वाले विद्यालयों के खिलाफ मान्यता निलंबन या निरस्तीकरण, जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 15 दिनों के भीतर संयुक्त जांच समिति द्वारा विद्यालयों का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
👨‍👩‍👧‍👦 अभिभावकों के हित में बड़ा कदम
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को अभिभावकों के हित में एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इससे शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुचित वसूली पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

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