अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉
लालकुआं में रील के जुनून पर भाई की डांट पड़ी भारी! 14 वर्षीय छात्रा की मौत से मचा कोहराम
पिता के बाद अब बेटी को खोने से टूट गया परिवार, मां की दुनिया उजड़ी; सोशल मीडिया के दौर में बच्चों से संवाद की जरूरत ने फिर खींचा ध्यान
लालकुआं। सोशल मीडिया पर रील बनाने को लेकर भाई की फटकार के बाद 14 वर्षीय किशोरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से लालकुआं क्षेत्र में सनसनी फैल गई। जिस घर में बच्चों की हंसी-खुशी से जिंदगी आगे बढ़नी थी, वहां अचानक चीख-पुकार और मातम छा गया। पिता को पहले ही खो चुके परिवार पर बेटी की असमय मौत ने दुखों का पहाड़ तोड़ दिया। घटना ने परिजनों से लेकर आसपास के लोगों तक को झकझोर कर रख दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लालकुआं नगर से सटे वीआईपी गेट स्थित वर्मा कॉलोनी निवासी स्वर्गीय संजय सक्सेना की 14 वर्षीय पुत्री राखी सक्सेना बिंदुखत्ता स्थित एक निजी विद्यालय में कक्षा आठ की छात्रा थी। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर लगातार रील बनाने को लेकर उसके 16 वर्षीय बड़े भाई ने उसे फटकार लगाई थी। इसके कुछ समय बाद किशोरी अपने कमरे में चली गई। बाद में वह कमरे में पंखे के कुंडे से लटकी मिली।
घटना का पता चलते ही परिवार में अफरा-तफरी मच गई। परिजन आनन-फानन में मदद के लिए जुटे और पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची लालकुआं कोतवाली पुलिस किशोरी को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय, हल्द्वानी ले गई, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस खबर के सामने आते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
मजदूरी कर तीन बच्चों का पालन-पोषण कर रही मां पर टूटा दुखों का पहाड़
बताया गया कि राखी की मां ममता सक्सेना सिडकुल स्थित एक कंपनी में मजदूरी कर अपने तीन बच्चों का भरण-पोषण करती हैं। पति की मृत्यु के बाद वह परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रही थीं। ऐसे कठिन हालात में बेटी को खोने से परिवार गहरे सदमे में है। घर में मातम पसरा है और परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहे लोग भी इस घटना से व्यथित हैं।
किशोरों को डांटने से पहले समझना भी जरूरी
यह घटना सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता और किशोरों के साथ संवाद के महत्व पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि, किशोरी की मौत के पीछे की पूरी परिस्थितियों और उसके मानसिक हालात की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। किशोरावस्था में बच्चों के व्यवहार, भावनाओं और ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर अभिभावकों का संवेदनशील रवैया बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि बच्चों की किसी आदत पर नाराजगी जताने के बजाय उनसे शांतिपूर्वक बात की जाए, उनकी परेशानी सुनी जाए और उन्हें भरोसा दिया जाए कि मुश्किल समय में परिवार उनके साथ है। छोटी-सी दिखने वाली परेशानी भी किसी किशोर के लिए बड़ी हो सकती है। ऐसे में संवाद, धैर्य और भावनात्मक सहयोग बेहद जरूरी हैं।
लालकुआं की इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया है। एक परिवार की खुशियां उजड़ गईं और पीछे कई सवाल छोड़ गई यह घटना समाज को याद दिलाती है कि बच्चों को अनुशासन सिखाने के साथ-साथ उनकी भावनाओं को समझना भी उतना ही आवश्यक है।

