सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रेखा आर्य का किया बचाव, 210 करोड़ के आरोपों पर गिरधारी लाल साहू से पूछा—22 साल तक चुप क्यों रहे?

अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रेखा आर्य का किया बचाव, 210 करोड़ के आरोपों पर गिरधारी लाल साहू से पूछा—22 साल तक चुप क्यों रहे?
देहरादून। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साहू की ओर से लगाए गए आरोपों के समय और आधार पर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि दोनों 22 साल से साथ थे, तो इतने लंबे समय तक आरोप क्यों नहीं लगाए गए? उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी ऑडियो रिकॉर्डिंग में किसी के कुछ कह देने मात्र से आरोप सही साबित नहीं हो जाते। मुख्यमंत्री के इस बयान को रेखा आर्य के समर्थन में सरकार का पक्ष सामने आने के रूप में देखा जा रहा है।
210 करोड़ की कथित संपत्ति के आरोपों से बढ़ा विवाद
विवाद उस समय और गहरा गया, जब रेखा आर्य की ओर से अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद साहू ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पलटवार किया। साहू ने आरोप लगाया कि रेखा आर्य ने करीब 210 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर गलत तरीके से अर्जित की है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मामले की जांच कराने की मांग भी की।
साहू ने अपने वीडियो में दावा किया कि उन्होंने पहले भी रेखा आर्य के विभागों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर आवाज उठाई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से जांच कर सच्चाई सामने लाने की अपील की। साथ ही, रेखा आर्य की ओर से साझा की गई कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग को एआई से तैयार किया गया बताते हुए फर्जी करार दिया और अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार बताया।
ऑडियो के आधार पर आरोप सही नहीं माने जा सकते: धामी
मुख्यमंत्री धामी ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि किसी भी आरोप की सत्यता जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होनी चाहिए। केवल किसी ऑडियो रिकॉर्डिंग में कही गई बात को निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। उन्होंने निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि कानून अपना काम करेगा और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री का 22 साल के संबंधों का हवाला देकर सवाल उठाना इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके बयान से स्पष्ट है कि सरकार आरोपों को बिना जांच अंतिम सत्य मानने के बजाय तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर निष्कर्ष निकालने की बात कर रही है।
जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें
इस प्रकरण में राजनीतिक हलचल इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि गिरधारी लाल साहू ने सीधे मुख्यमंत्री से शिकायत करते हुए रेखा आर्य के खिलाफ जांच की मांग की है। दूसरी ओर, ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और कथित संपत्ति को लेकर दोनों पक्षों के दावे विवाद के केंद्र में हैं।
हालांकि, रेखा आर्य पर लगाए गए 210 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। मामले में वास्तविक स्थिति जांच और साक्ष्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान रेखा आर्य के समर्थन में सरकार का रुख सामने लाता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में दोनों पक्षों के दावों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य मिलते हैं।