फीस को लेकर निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर डीएम रयाल का शिकंजा, अभिभावकों से वसूली तो होगी ₹5 लाख तक की कार्रवाई!

ख़बर शेयर करें

अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉 बिन्दुखत्ता 👉 कुमाऊं 👉
निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर डीएम रयाल का शिकंजा, अभिभावकों से वसूली तो होगी ₹5 लाख तक की कार्रवाई!

फीस के नाम पर आर्थिक शोषण नहीं होगा बर्दाश्त, सीईओ गोविंद राम जायसवाल ने जारी किए सख्त निर्देश; एनओसी निरस्त करने तक की कार्रवाई संभव

हल्द्वानी। निजी विद्यालयों द्वारा फीस के नाम पर की जा रही मनमानी वसूली पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने साफ कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीएम के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने जिले के सभी निजी विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण और वसूली को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शिक्षण शुल्क के अलावा प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क या अन्य किसी भी मद में अनधिकृत धनराशि वसूलना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। विद्यालय केवल वास्तविक खर्च और निर्धारित नियमों के अनुसार ही शुल्क ले सकेंगे।
जारी आदेश के अनुसार प्रवेश शुल्क औचित्यपूर्ण खर्च के आधार पर ही लिया जा सकेगा। वहीं शिक्षण शुल्क और परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त लिए जाने वाले अन्य शुल्कों को विकास शुल्क के रूप में समायोजित करना होगा, जिसे न्यूनतम रखा जाएगा। इसके लिए अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) की अनुमति अनिवार्य होगी। किसी अन्य नाम से अतिरिक्त शुल्क वसूली की अनुमति नहीं होगी।
तीन साल में सिर्फ 10 प्रतिशत तक बढ़ेगी फीस
निजी विद्यालयों को राज्य सरकार की संबद्धता संबंधी शर्तों का पालन करना होगा। इसके तहत तीन वर्षों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही शुल्क वृद्धि की जा सकेगी। शुल्क बढ़ाने से पहले पीटीए की स्वीकृति लेना भी जरूरी होगा।
मनमानी पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक जुर्माना
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम, सीबीएसई उपविधियों और अन्य प्रचलित नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे विद्यालयों पर एक लाख रुपये से पांच लाख रुपये तक आर्थिक दंड, मान्यता समाप्त करने और एनओसी निरस्त करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
परीक्षा और शुल्क व्यवस्था पर भी लगाम
नए निर्देशों के अनुसार विद्यालय पूरे सत्र में केवल चार मासिक परीक्षाएं, एक अर्द्धवार्षिक और एक वार्षिक परीक्षा ही आयोजित कर सकेंगे। बोर्ड कक्षाओं में अधिकतम एक या दो प्री-बोर्ड परीक्षाएं ही कराई जा सकेंगी। परीक्षा शुल्क वास्तविक खर्च के आधार पर तय होगा और उच्चतम कक्षा के लिए यह 600 रुपये से अधिक नहीं होगा। वहीं स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) शुल्क मात्र एक रुपये निर्धारित किया गया है।
अभिभावकों को मिली बड़ी राहत
विद्यालय अब अभिभावकों को मासिक, त्रैमासिक, छमाही या वार्षिक शुल्क जमा करने का विकल्प देंगे। किसी भी अभिभावक को एकमुश्त फीस जमा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। प्रत्येक भुगतान की रसीद देना विद्यालयों के लिए अनिवार्य होगा।
अतिरिक्त वसूली का होगा समायोजन
शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में यदि कोई अतिरिक्त शुल्क वसूला गया है तो उसका समायोजन जुलाई 2026 के शिक्षण शुल्क में किया जाएगा। यदि अतिरिक्त राशि अधिक होगी तो उसे आगामी महीनों के शुल्क में समायोजित करना होगा। सभी विद्यालयों को सात दिनों के भीतर इसका प्रमाणित विवरण शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराना होगा।
जिला प्रशासन के इस सख्त कदम से निजी विद्यालयों की मनमानी फीस व्यवस्था पर लगाम लगने और हजारों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

error: Content is protected !!