अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
सुरेंद्र सिंह लोटनी की अध्यक्षता में मनाया कुमाऊं दिवस एवं पैदल सेना दिवस, पूर्व सैनिकों और वीर नारियों का सम्मान
हल्दूचौड़। हल्दूचौड़ स्थित मां वैष्णो बैंक्वेट हॉल में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को कुमाऊं दिवस एवं पैदल सेना दिवस धूमधाम से मनाया गया। पूर्व सैनिकों की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कुमाऊं की वीर परंपरा, भारतीय सेना के शौर्य और राष्ट्रसेवा में सैनिकों के योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेजर जनरल इंदर सिंह बोरा रहे, जबकि अध्यक्षता पूर्व सैनिक एवं नगर पंचायत अध्यक्ष लालकुआं सुरेंद्र सिंह लोटनी ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद सरस्वती वंदना के साथ आयोजन की शुरुआत हुई। वक्ताओं ने कुमाऊं के गौरवशाली इतिहास और कुमाऊं रेजिमेंट की वीरता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वीरभूमि के सैनिकों ने अपने अदम्य साहस, अनुशासन और बलिदान से देश का गौरव बढ़ाया है। राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा में भारतीय सेना के जवानों का योगदान सदैव प्रेरणादायी रहा है।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह लोटनी ने पूर्व सैनिकों के साथ वीर नारियों को सम्मानित किया। वीर नारियों के त्याग, समर्पण और धैर्य को नमन करते हुए राष्ट्रसेवा में उनके परिवारों के योगदान की सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि देश की रक्षा में अपने प्रियजनों का योगदान देने वाले सैनिक परिवार भी सम्मान और कृतज्ञता के पात्र हैं।
कार्यक्रम में 16 कुमाऊं के ऑनरी कैप्टन राजेंद्र जलाल को पांच राष्ट्रपतियों से सम्मान प्राप्त होने के उपलक्ष्य में विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने उनके योगदान और उपलब्धियों की सराहना की।
वक्ताओं ने कहा कि कुमाऊं की धरती शौर्य, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की गौरवशाली परंपरा के लिए जानी जाती है। पूर्व सैनिकों और वीर नारियों का सम्मान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके त्याग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सैनिकों के बलिदान, अनुशासन और देशभक्ति से प्रेरणा लेनी चाहिए तथा इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए।
कार्यक्रम के माध्यम से पूर्व सैनिकों ने आपसी एकता, भाईचारे और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। आयोजन में पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने सहभागिता कर कुमाऊं दिवस एवं पैदल सेना दिवस की गरिमा बढ़ाई।

