अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
सांसों की मशीन का घुट रहा दम, डेढ़ करोड़ का ऑक्सीजन प्लांट फिर ठप
11 माह बंद रहने के बाद जनवरी में हुआ था चालू, अब चार माह से तकनीकी खराबी के चलते बंद; सिलिंडरों के सहारे मरीजों की सांसें
नैनीताल। बीडी पांडे अस्पताल में मरीजों के बेड तक सीधे ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से लगाया गया ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट एक बार फिर ठप हो गया है। हैरानी की बात यह है कि लंबे समय तक बंद रहने के बाद जनवरी 2026 में ही इसे दोबारा शुरू किया गया था, लेकिन तकनीकी खराबी के चलते पिछले करीब चार माह से इसका संचालन फिर बंद है। ऐसे में अस्पताल की सेंट्रल ऑक्सीजन व्यवस्था फिलहाल सिलिंडरों और ऑक्सीजन कंसंट्रेटरों के भरोसे चल रही है।
कोविड काल में बना था प्लांट, अब खुद ही ऑक्सीजन को तरस रहा
कोविड काल में मरीजों को निर्बाध ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बीडी पांडे अस्पताल में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित किया गया था। इसे अस्पताल के पहले से मौजूद सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम से जोड़ा गया था, ताकि पाइपलाइन के जरिये अस्पताल के प्रत्येक बेड तक सीधे ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके। शुरुआत में प्लांट से अस्पताल को काफी सुविधा मिली, लेकिन समय के साथ नियमित देखरेख और मरम्मत के अभाव में तकनीकी समस्याएं बढ़ती गईं।
पहले 11 माह बंद रहा, अब फिर चार माह से ठप
पिछले वर्ष फरवरी में प्लांट के उपकरणों में लगे वॉल्व खराब हो गए थे। इसके बाद प्लांट का संचालन पूरी तरह बंद हो गया और करीब 11 माह तक यह व्यवस्था ठप रही। लंबे समय तक प्लांट बंद रहने के बाद हाईकोर्ट की फटकार के बीच इसकी खामियां दूर करने की कवायद शुरू हुई। आखिरकार जनवरी 2026 में प्लांट को दुरुस्त कर दोबारा चालू किया गया। लेकिन कुछ ही समय बाद फिर तकनीकी खराबियां सामने आ गईं और अब करीब चार माह से प्लांट बंद पड़ा है।
सिलिंडरों से चल रही सेंट्रल ऑक्सीजन व्यवस्था
प्लांट बंद होने के बाद अस्पताल प्रबंधन सिलिंडरों और ऑक्सीजन कंसंट्रेटरों के सहारे व्यवस्था संभाल रहा है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पर्याप्त संख्या में ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध हैं और इन्हें सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम से जोड़कर मरीजों के बेड तक ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है। इसके अलावा अस्पताल में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं।
मरम्मत की अनुमति मिली, विशेषज्ञों से संपर्क
बीडी पांडे अस्पताल की पीएमएस डॉ. द्रौपदी गर्ब्याल ने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त संख्या में ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध हैं। इन्हें सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम से जोड़कर सभी बेड तक ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी पर्याप्त संख्या में हैं। प्लांट की मरम्मत के लिए अनुमति मिल चुकी है और तकनीकी विशेषज्ञों से संपर्क किया गया है। जल्द ही प्लांट को दुरुस्त कर दोबारा संचालित किया जाएगा।
सवाल यह है कि करोड़ों की लागत से तैयार की गई जीवनरक्षक व्यवस्था बार-बार तकनीकी खराबी के कारण बंद क्यों हो रही है? कोविड जैसी आपात स्थिति के लिए तैयार किया गया प्लांट यदि महीनों तक बंद रहे तो इसकी नियमित निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

