आबादी में बाघ-तेंदुए की दस्तक से हड़कंप, वन विभाग ने दो पिंजरे लगाए

अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉

आबादी में बाघ-तेंदुए की दस्तक से हड़कंप, वन विभाग ने दो पिंजरे लगाए

हल्दूचौड़। बरेली रोड के ग्रामीण क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों में जंगली बाघ और तेंदुए के बार-बार आबादी क्षेत्र में घुसने तथा पशुओं पर हमले की घटनाएं बढ़ने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र पंचायत सदस्यों, ग्राम प्रधानों और स्थानीय ग्रामीणों की मांग को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने बाघ और तेंदुए को पकड़ने के लिए मंगलवार को दो पिंजरे लगाए।

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वन विभाग ने एक पिंजरा देवरामपुर और दूसरा परमा गांव के उन संभावित स्थानों पर लगाया है, जहां वन्यजीवों की आवाजाही की आशंका जताई गई है। विभाग का उद्देश्य आबादी क्षेत्र में लगातार दिखाई दे रहे बाघ या तेंदुए को पकड़कर ग्रामीणों और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

अभियान की अगुवाई एसडीओ पूर्वी तराई अनिल जोशी, वन क्षेत्राधिकारी पूर्वी तराई गौला रेंज सीएस अधिकारी तथा फोरेस्टर दीप चंद्र आर्य ने की। अधिकारियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, किसानों और पशुपालकों की मौजूदगी में वन्यजीवों के संभावित मूवमेंट वाले स्थानों का निरीक्षण कर पिंजरे लगाने के लिए स्थल का चयन किया।

इस दौरान क्षेत्र पंचायत सदस्य दुर्गापालपुर-परमा राजेंद्र चंद्र दुर्गापाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य हल्दूचौड़-दौलिया सोनी पंत, क्षेत्र पंचायत सदस्य हल्दूचौड़ दीना चिंतामणी पांडे और ग्राम प्रधान हल्दूचौड़ दीना पूजा बिष्ट समेत स्थानीय ग्रामीण और पशुपालक मौजूद रहे।

वन विभाग के अनुसार बाघ या तेंदुए की गतिविधियों और मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जाएगी। जरूरत के अनुसार वन्यजीवों की आवाजाही वाले स्थानों को देखते हुए लगाए गए पिंजरों को दूसरी जगह भी स्थानांतरित किया जा सकता है।

जनसुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग

लगातार आबादी क्षेत्र में वन्यजीवों की दस्तक से ग्रामीणों में भय का माहौल है। पंचायत प्रतिनिधियों ने वन विभाग की ओर से की गई कार्रवाई का स्वागत करते हुए अधिकारियों से जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ और तेंदुए के आबादी के नजदीक आने से सबसे ज्यादा खतरा किसानों, पशुपालकों और खेतों में काम करने वाले ग्रामीणों को बना हुआ है।

पंचायत प्रतिनिधियों ने विभागीय अधिकारियों से पिंजरों के साथ-साथ क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और वन्यजीवों की मौजूदगी वाले संवेदनशील इलाकों में आवश्यक सुरक्षा उपाय करने का अनुरोध किया है।