बिन्दुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग को लेकर 20वें दिन शिवपुरी नंबर-6 पहुंची घर-घर पदयात्रा, 27 सितंबर की रैली को लेकर जुटने का आह्वान

अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिन्दुखत्ता 👉 राजस्व ग्राम की मांग को लेकर 20वें दिन शिवपुरी नंबर-6 पहुंची घर-घर पदयात्रा, 27 सितंबर की रैली को लेकर जुटने का आह्वान
वन अधिकार संगठन ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, जनजाति मंत्रालय के पत्रों के अनुसार अधिसूचना जारी करने की मांग
बिंदुखत्ता, 3 सितंबर। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर वन अधिकार संगठन एवं पूर्व सैनिक संगठन के तत्वावधान में 15 अगस्त से शहीद स्मारक से शुरू हुई घर-घर पदयात्रा गुरुवार को 20वें दिन शिवपुरी नंबर-6 पहुंची। पदयात्रा में सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लेकर राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने की मांग को मजबूती दी। इस दौरान आगामी 27 सितंबर को प्रस्तावित विशाल जनसभा एवं रैली में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीणों से संपर्क किया गया।
पदयात्रा के दौरान आयोजकों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी इस अभियान से जोड़ें। जो लोग किसी कारणवश पदयात्रा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, उनसे सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान को मजबूत करने का आह्वान किया गया।
वन अधिकार संगठन के नंदन बोरा ने कहा कि उत्तराखंड शासन ने वर्ष 2022 में बिंदुखत्ता समेत 14 टोंगिया ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की प्रक्रिया वन अधिकार कानून के तहत पूरी करने का निर्णय लिया था। इसके लिए समाज कल्याण विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया था। उन्होंने कहा कि इन 14 ग्रामों में से नैनीताल के रामपुर, लेटी और चोपड़ा तथा हरिद्वार के कमला नगर, पुरुषोत्तमनगर और हरिपुर को राजस्व ग्राम घोषित किया जा चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब अन्य ग्रामों में वन अधिकार कानून के तहत प्रक्रिया पूरी कर राजस्व ग्राम घोषित किया जा सकता है तो बिंदुखत्ता के मामले में अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है। उनका कहना था कि बिंदुखत्ता के मामले में प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अधिसूचना जारी करने के बजाय वन भूमि अनारक्षण का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाने की बात कही जा रही है। इसे उन्होंने बिंदुखत्तावासियों के साथ दोहरे व्यवहार का उदाहरण बताया।
नंदन बोरा ने यह भी आरोप लगाया कि बिंदुखत्ता के संबंध में जनजाति मंत्रालय, भारत सरकार के महत्वपूर्ण पत्रों एवं निर्देशों को दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन लगातार शासन-प्रशासन के समक्ष दस्तावेज और तथ्य रखते हुए राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने की मांग कर रहा है।
पदयात्रा के बाद वन अधिकार संगठन के पदाधिकारियों एवं ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी लालकुआं के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में जनजाति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी पत्रों एवं निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करते हुए बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना तत्काल जारी करने की मांग की गई।
पदयात्रा में उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, रमेश गोस्वामी, दौलत सिंह कोरंगा, एडवोकेट बलवंत बिष्ट, करम सिंह कोरंगा, संध्या डालाकोटी, ममता बिष्ट, राजू राणा, चंचल सिंह, त्रिलोक सुयाल, कुंदन सिंह, गंगा सिंह, गोविंद गिरी, गोपाल जोशी, भूपेश जोशी, प्रकाश उत्तराखंडी, दीपक रौतेला, बलवंत परिहार, मनोज कोरंगा, जेसी उप्रेती, कैलाश चंद्र, खड़क बाफिल, प्रेम तिवारी, रविंद्र प्रसाद, किरण तिवारी, मोहनी मेहता, नीलम मेहता, भगवती देवी, गीता दानू, जानकी देवी, हीरा देवी, राजकुमारी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।