लालकुआ हल्दुचौड़ं सात दिन की जांच 19 दिन में भी अधूरी, यूसीएफ की खुदाई पर उठे सवाल; रिपोर्ट का इंतजार

अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉

सात दिन की जांच 19 दिन में भी अधूरी, यूसीएफ की खुदाई पर उठे सवाल; रिपोर्ट का इंतजार

 

लालकुआं। हल्दूचौड़ स्थित उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) के सोयाबीन एवं वनस्पति कॉम्प्लेक्स में भवन ध्वस्तीकरण के दौरान जमीन की गहराई तक खुदाई किए जाने के आरोपों की जांच अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। सात सितंबर को पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर महज एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन 26 सितंबर तक भी जांच पूरी नहीं हो सकी। तय समयसीमा से 12 दिन अधिक बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट सामने न आने से मामले को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

 

यूसीएफ के महाप्रबंधक त्रिभुवन रावत ने मामले की जांच के लिए परियोजना अधिकारी त्रिलोचन पाठक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की थी। कमेटी में नैनीताल की जिला प्रबंधक प्रेमा हर्बोला, सहायक अभियंता शुभम बिष्ट, अवर अभियंता मानवेंद्र सिंह और अकाउंटेंट दीपक तिवारी को शामिल किया गया था। कमेटी को मौके की स्थिति और लगाए गए आरोपों की जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपनी थी।

 

लेकिन निर्धारित अवधि गुजरने के बाद भी रिपोर्ट नहीं आने से अब सवाल उठ रहा है कि आखिर जांच में ऐसी क्या पेचीदगी है, जिसके चलते 19 दिन बाद भी निष्कर्ष सामने नहीं आ पाया। क्या मौके की तकनीकी जांच पूरी नहीं हुई है, रिकॉर्ड और दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं या फिर जांच की प्रक्रिया किसी अन्य कारण से लंबी खिंच रही है—इसका स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आया है।

 

मामले का मुख्य विवाद भवन ध्वस्तीकरण के दौरान मलबा हटाने के साथ जमीन की गहराई तक कथित खुदाई को लेकर है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ध्वस्तीकरण की आड़ में जमीन को जरूरत से अधिक गहराई तक खोदा गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी, लेकिन जांच में लगातार हो रही देरी ने पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है।

 

इधर प्रशासन भी मामले पर नजर बनाए हुए है। एसडीएम लालकुआं रेखा कोहली के मुताबिक प्रशासन की ओर से भी रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। ऐसे में अब निगाहें यूसीएफ की जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच रिपोर्ट में केवल औपचारिकता पूरी की जाएगी या ध्वस्तीकरण से लेकर खुदाई और मलबे के निस्तारण तक पूरे मामले की तकनीकी और दस्तावेजी पड़ताल होगी। मौके की वास्तविक स्थिति, खुदाई की गहराई, ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया, संबंधित रिकॉर्ड और मलबे के निस्तारण से जुड़े पहलुओं को जांच में शामिल किया गया है या नहीं, यह भी रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

 

सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश के बावजूद 19 दिन बाद भी जांच अधूरी है। अब सवाल सिर्फ खुदाई के आरोपों का नहीं, बल्कि जांच की धीमी रफ्तार का भी है। यूसीएफ को स्पष्ट करना होगा कि रिपोर्ट में देरी की वजह क्या है और निष्कर्ष सामने आने के लिए अब और कितना इंतजार करना पड़ेगा।