आईजी निवेदिता कुकरेती का बड़ा बयान: जंतर-मंतर वायरल वीडियो मामले में आरक्षी शेर सिंह पर होगी कड़ी विभागीय और वैधानिक कार्रवाई:देखें इंटरव्यू

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉 कुमाऊं 👉
आईजी निवेदिता कुकरेती का बड़ा बयान: जंतर-मंतर वायरल वीडियो मामले में आरक्षी शेर सिंह पर होगी कड़ी विभागीय और वैधानिक कार्रवाई

बिना अनुमति ड्यूटी से गायब चल रहे आरक्षी को पहले ही किया जा चुका है निलंबित, पुराने आपराधिक मामले और वायरल वीडियो दोनों की होगी सख्त जांच।
हल्द्वानी। दिल्ली के जंतर-मंतर से उत्तराखंड पुलिस के आरक्षी शेर सिंह का सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। इस मामले में आईजी कुमाऊँ श्रीमती निवेदिता कुकरेती ने स्पष्ट किया है कि अनुशासनहीनता और अमर्यादित टिप्पणी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा संबंधित आरक्षी के विरुद्ध विभागीय और वैधानिक नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।


आईजी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि आरक्षी शेर सिंह वर्तमान में जनपद पिथौरागढ़ में तैनात है और 28 जून 2026 से बिना किसी वैध अनुमति के अपनी ड्यूटी से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित चल रहा है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर 20 जुलाई 2026 को उसे निलंबित कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि संबंधित आरक्षी का नाम पहले भी गंभीर आपराधिक मामले में सामने आ चुका है। आरोप है कि उसने एक अन्य आरक्षी के साथ मिलकर अंतरराज्यीय गैंगस्टर प्रवीण बाल्मीकि के सहयोग से भोले-भाले लोगों की भूमि पर अवैध कब्जे जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई थी। इस मामले में हरिद्वार के कोतवाली गंगनहर में दर्ज मुकदमे के आधार पर 15 सितंबर 2025 को उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जहां लगभग दो माह रहने के बाद 7 नवंबर 2025 को उच्च न्यायालय, नैनीताल से जमानत मिली थी।
आईजी कुमाऊँ ने कहा कि उक्त प्रकरण में संबंधित आरक्षी के विरुद्ध विभागीय जांच पहले से ही प्रचलित है और सेवा से बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी चल रही है। अब जंतर-मंतर पर दिए गए कथनों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को भी गंभीरता से लेते हुए उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
कुमाऊँ रेंज पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी कर्मचारी द्वारा सेवा नियमों का उल्लंघन या विभाग की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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