धाकड़ धामी की सोच, आईजी रिद्धिम की निगरानी—कुमाऊँ में भरोसे की पुलिसिंग

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अजय अनेजा 👉 संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
अपराध पर सख़्ती, पीड़ित पर संवेदना—कुमाऊँ में भरोसे की पुलिसिंग
नैनीताल।
उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में शासन की प्राथमिकता केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उनका ज़मीनी असर सुनिश्चित करना है। इसी सोच का सशक्त उदाहरण कुमाऊँ परिक्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहाँ डायल 112 जैसी आपातकालीन सेवा को अब महज़ “रिस्पॉन्स सिस्टम” नहीं, बल्कि पीड़ित-संतुष्टि आधारित पुलिसिंग मॉडल के रूप में विकसित किया गया है।
मुख्यमंत्री धामी के विज़न के अनुरूप पुलिस व्यवस्था को कानून-व्यवस्था तक सीमित न रखकर जन-सेवा, संवेदनशीलता और भरोसे से जोड़ा गया है। इस विज़न को ज़मीन पर उतारने का काम कुमाऊँ परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक रिद्धिम अग्रवाल के नेतृत्व में तेज़ी से हो रहा है।
आईजी रिद्धिम अग्रवाल के स्पष्ट निर्देश हैं कि “तेज़ रिस्पॉन्स ही नहीं, बल्कि पीड़ित की संतुष्टि ही पुलिस कार्रवाई की असली कसौटी है।” इसी सोच के चलते कुमाऊँ में डायल 112 अब एक ऐसी व्यवस्था बन चुकी है, जो तेज़, संवेदनशील, जवाबदेह और परिणाम-आधारित है।
हर सूचना पर बनेगा पुलिस कार्रवाई का रिपोर्ट कार्ड
अब कुमाऊँ में पुलिस को मिली हर सूचना पर यह मॉनिटर किया जाएगा कि क्या कार्रवाई हुई, कितनी प्रभावी रही और पीड़ित संतुष्ट है या नहीं। लापरवाही या हीला-हवाली पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई तय की गई है। इससे एक ओर जनता का भरोसा बढ़ेगा, वहीं पुलिसिंग और अधिक जवाबदेह होगी।
डायल 112 : अब सिर्फ़ नंबर नहीं, जनता का भरोसा
डायल 112 पर आई हर गंभीर कॉल की वरिष्ठ स्तर पर समीक्षा, कार्रवाई के बाद पीड़ित से सीधा फीडबैक और लापरवाही पर तत्काल जवाबदेही—यह व्यवस्था कुमाऊँ पुलिसिंग की नई पहचान बन चुकी है।
गंभीर मामलों पर विशेष निगरानी
आईजी रिद्धिम अग्रवाल के निर्देशों पर सितंबर से 31 दिसंबर 2025 तक हत्या, महिला अपराध, लूट, एससी/एसटी, मानव तस्करी, स्नैचिंग और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों पर विशेष फीडबैक सिस्टम लागू किया गया।
कुल 3432 गंभीर कॉल में 3016 महिला अपराध से संबंधित रहीं, जो दर्शाता है कि कुमाऊँ पुलिस हर कॉल के पीछे खड़े व्यक्ति को प्राथमिकता दे रही है।
मैदान से आए भरोसे के उदाहरण
महिला पर्यटक से मारपीट की घटना पर त्वरित कार्रवाई, सड़क दुर्घटना में घायलों का तत्काल रेस्क्यू, नशे में फंसे युवक को नई राह दिखाना, 11 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म प्रयास में तत्काल गिरफ्तारी और वरिष्ठ नागरिकों की संवेदनशील सहायता—ये सभी उदाहरण बताते हैं कि कुमाऊँ पुलिस अब कानून के साथ-साथ करुणा का भी परिचय दे रही है।
सख़्ती और संवेदनशीलता का संतुलन
आईजी रिद्धिम अग्रवाल के नेतृत्व में कुमाऊँ पुलिसिंग भय से भरोसे की ओर बढ़ रही है। यहाँ स्पष्ट संदेश है—अपराध पर सख़्ती होगी, लेकिन पीड़ित के प्रति संवेदना सर्वोपरि रहेगी।

 

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