अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिन्दुखत्ता 👉
बहाने नहीं, अब लिखित तारीख दो सरकार! 27 सितंबर के बाद बिंदुखत्ता में अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
बिंदुखत्ता। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। वर्षों से आश्वासनों का इंतजार कर रही जनता ने अब सरकार से साफ शब्दों में कहा है कि कोरे आश्वासन नहीं, लिखित आश्वासन और समयबद्ध तारीख चाहिए। आगामी 27 सितंबर रविवार को प्रस्तावित जनसभा एवं विशाल रैली को लेकर बिंदुखत्ता के सभी 32 गांवों में चल रही घर-घर पदयात्रा गुरुवार को 27वें दिन भी जारी रही।
गुरुवार को पदयात्रा चित्रकूट मंदिर से शुरू होकर तिवारीनगर की गलियों से होते हुए वन देवी मंदिर तिवारीनगर पहुंची। यहां रात्रि में भजन-कीर्तन के साथ जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। पदयात्रा के दौरान ग्रामीणों से 27 सितंबर की रैली में बड़ी संख्या में पहुंचने का आह्वान किया गया।
रैली संयोजक कैप्टेन इंद्र सिंह पनेरी ने कहा कि बिंदुखत्ता की जनता अब वर्षों से चले आ रहे आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। 27 सितंबर की रैली सरकार के लिए जनता की एकजुटता और मांग की गंभीरता का स्पष्ट संदेश होगी। उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता के सभी 32 गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण रैली में पहुंचेंगे।
कैप्टेन पनेरी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस बार मुख्यमंत्री स्वयं रैली स्थल पर पहुंचकर राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी किए जाने की सूचना दें अथवा मांग पर स्पष्ट और समयबद्ध लिखित आश्वासन दें। उन्होंने कहा कि अब जनता को सिर्फ मंच से कही गई बातें नहीं, बल्कि लिखित तारीख चाहिए। यदि सरकार ने फिर टालमटोल की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में 27 सितंबर की रैली के बाद रैली स्थल पर ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का निर्णय लिया जा सकता है। साथ ही क्रमिक अनशन जैसे कदमों पर भी विचार किया जाएगा। कैप्टेन पनेरी ने कहा कि इसके बाद पैदा होने वाली स्थिति की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
पदयात्रा में संगठन अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, बलवंत सिंह बिष्ट, कैप्टेन इंद्र सिंह पनेरी, दीपक जोशी, ममता बिष्ट, मीना मेहता, रेखा कार्की, संध्या डालाकोटी, दौलत सिंह कोरंगा, रमेश गोस्वामी, नवीन जोशी, कैप्टेन खुशाल सिंह कोश्यारी, दानी कोरंगा, लोक कलाकार सोहन लाल, जीवन पांडे, दीपक पाठक, बिरेन्द्र कार्की, हरीश कोरंगा, रणजीत सिंह, भवान सिंह कठायत, दीवान सिंह, गोविन्द गिरी सहित चित्रकूट-तिवारीनगर क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण शामिल रहे।
आंदोलनकारियों का कहना है कि 27 सितंबर की रैली के बाद बिंदुखत्ता के आंदोलन की अगली दिशा सरकार के रुख पर निर्भर करेगी। अब सवाल सिर्फ आश्वासन का नहीं, बल्कि सरकार द्वारा मांग पर स्पष्ट निर्णय और उसकी समयसीमा बताने का है।

