अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिन्दुखत्ता 👉
बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग तेज, इंडिया गठबंधन का क्रमिक अनशन 13वें दिन जारी
कांग्रेस नेता भुवन पाठक और पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने आंदोलन को दिया समर्थन, कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में मांग शामिल कराने की पैरवी
लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर क्षेत्र में आंदोलन लगातार जारी है। लालकुआं तहसील परिसर में इंडिया गठबंधन का क्रमिक अनशन 13वें दिन और बिंदुखत्ता वन अधिकार संगठन का धरना 10वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने सरकार से बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की मांग पूरी करने की अपील की। वहीं, आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिलने से आंदोलनकारियों का उत्साह बढ़ रहा है।

बुधवार को रचनात्मक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भुवन पाठक और पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों को अपना समर्थन दिया। इस दौरान नेताओं ने बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने की मांग को जायज बताते हुए इसे प्रमुखता से उठाने की बात कही। उनके धरना स्थल पर पहुंचने से आंदोलनकारियों को राजनीतिक स्तर पर भी अपनी मांग को मजबूती मिलने की उम्मीद जगी है।
कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में मांग शामिल कराने की पैरवी
आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे कांग्रेस नेता भुवन पाठक ने बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल कराने के लिए पहल की। उन्होंने घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष भुवन कापड़ी से फोन पर वार्ता कर इस मांग को पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने की पैरवी की। आंदोलनकारियों को उम्मीद है कि राजनीतिक दलों के स्तर पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने से बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की दिशा में ठोस पहल हो सकेगी।
13वें दिन पांच आंदोलनकारी बैठे क्रमिक अनशन पर
इंडिया गठबंधन के क्रमिक अनशन के 13वें दिन कुंदन सिंह मेहता, रमेश राणा, गोपाल सिंह दानू, रनजीत सिंह कनवाल और बिशन सिंह पंवार क्रमिक अनशन पर बैठे। वहीं, बिंदुखत्ता वन अधिकार संगठन का धरना 10वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों का कहना है कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा मिलने से क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो सकेगी।
लगातार जारी धरने और क्रमिक अनशन के बीच आंदोलनकारियों ने अपनी मांग को लेकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। अब सभी की निगाहें सरकार और राजनीतिक दलों की आगामी पहल पर टिकी हैं।

