अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
देहरादून से हरिद्वार तक फैला पाकिस्तानी नेटवर्क का साया! मजदूरी करने वाले युवकों के जरिए स्लीपर सेल की जड़ें तलाश रही एजेंसियां
देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड में पाकिस्तान समर्थित कथित स्लीपर सेल नेटवर्क के तार जुड़ने की खबर ने सुरक्षा एजेंसियों के साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, हरिद्वार और देहरादून से जुड़े चार युवकों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां सोशल मीडिया के जरिए फैल रहे संदिग्ध नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने में जुट गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन युवकों के नाम सामने आए हैं, वे सामान्य मजदूरी और छोटे काम करने वाले परिवारों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरफ्तार युवकों में देहरादून में टाइल्स लगाने का कार्य करने वाला 20 वर्षीय शाहरुख, हरिद्वार के रुड़की क्षेत्र का मुशर्रफ, सहारनपुर का महकाब और मुजफ्फरनगर का गगनदीप शामिल हैं। एटीएस के मुताबिक इन युवकों का संपर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तान से जुड़े कथित गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आकिब उर्फ आबिद जट्ट के नेटवर्क से हुआ था। आरोप है कि युवकों को अस्पताल, राजनीतिक दलों के कार्यालय और अन्य संवेदनशील संस्थानों की रेकी और हमले की साजिश से जुड़े निर्देश दिए जा रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया है कि नोएडा में कथित रूप से एक बैठक हुई थी, जिसमें धनराशि और हथियारों की व्यवस्था पर चर्चा की गई। एजेंसियां अब मोबाइल फोन रिकॉर्ड, सोशल मीडिया चैट, वीडियो कॉल और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही हैं। साथ ही पीओके से आरडीएक्स और हथियारों की आपूर्ति की संभावनाओं को भी खंगाला जा रहा है।
देहरादून में मजदूरी कर परिवार का सहारा बने शाहरुख को लेकर गांव के लोग अब तक स्तब्ध हैं। ग्रामीणों के अनुसार उसका व्यवहार सामान्य था और उसका नाम पहले कभी किसी विवाद या आपराधिक गतिविधि में नहीं आया। लोगों का कहना है कि वह मिलनसार युवक था और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद भी करता था।
इसी तरह रुड़की के ढंडेरा निवासी मुशर्रफ को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाओं का माहौल है। स्थानीय लोगों के अनुसार वह वेल्डिंग और मजदूरी का काम करता था और ईद मनाने के लिए कुछ दिन पहले गांव लौटा था। परिवार की क्षेत्र में अच्छी पहचान बताई जाती है, इसलिए उसके नाम के सामने आने से लोग हैरान हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक पहुंच रहे कट्टरपंथी और आपराधिक नेटवर्क की गंभीर चेतावनी भी है। मजदूरी और असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले युवाओं को डिजिटल माध्यमों से निशाना बनाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में परिवारों और समाज को भी युवाओं की ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत महसूस की जा रही है।
मजदूरी की आड़ में ‘पाकिस्तानी स्लीपर सेल’ का खेल! देहरादून-हरिद्वार तक फैले नेटवर्क से हड़कंप
