🐘 मौत बनकर मंडरा रहा टांडा का खूंखार टस्कर”हाथी — 72 घंटे में तीसरी जान, दहशत में लालकुआं 🐘

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉 बिन्दुखत्ता 👉 कुमाऊं 👉 🐘 मौत बनकर मंडरा रहा टांडा का खूंखार टस्कर” — 72 घंटे में तीसरी जान, दहशत में लालकुआं 🐘
लालकुआं। लालकुआं क्षेत्र के टांडा जंगल में एक डेड दांत वाला खूंखार टस्कर हाथी इन दिनों मौत का दूसरा नाम बन चुका है। पिछले 72 घंटों में तीसरी जान लेने के बाद पूरे इलाके में भय, आक्रोश और असुरक्षा का माहौल गहरा गया है। शुक्रवार को जंगल में लकड़ी बीनने गई एक 60 वर्षीय महिला को हाथी ने बेरहमी से पटक-पटक कर मार डाला। इस दर्दनाक घटना के बाद ग्रामीणों में भारी रोष है और उन्होंने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शाह पठानी गांव से पंतनगर की ओर जाने वाले जंगल मार्ग में तीन महिलाएं लकड़ी बीनने गई थीं। इसी दौरान अचानक जंगल से निकले डेड दांत वाले टस्कर हाथी ने उन पर हमला बोल दिया। हाथी को सामने देख महिलाएं जान बचाने के लिए इधर-उधर भागीं, लेकिन हाथी ने 60 वर्षीय मैंना देवी पत्नी स्वर्गीय बाबूलाल, निवासी झा कॉलोनी पंतनगर, को निशाना बना लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हाथी ने महिला को सूंड में लपेटकर कई बार जमीन पर पटक दिया और फिर अपने पैरों से कुचल डाला। हमले की बर्बरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महिला ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। साथ गई अन्य महिलाएं किसी तरह जान बचाकर कॉलोनी पहुंचीं और ग्रामीणों को घटना की सूचना दी।
सूचना मिलते ही सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हाथी जंगल की ओर वापस जा चुका था। मौके पर लालकुआं कोतवाली प्रभारी निरीक्षक ब्रजमोहन सिंह राणा और टांडा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी रूप नारायण गौतम पुलिस व वन विभाग की टीम के साथ पहुंचे और जांच शुरू की।
मृतका अपने पीछे एक बेटा और दो बेटियां छोड़ गई हैं। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
गौरतलब है कि इसी टस्कर हाथी ने दो दिन पहले सांप पठानी क्षेत्र में खेत में सो रहे दो लोगों को भी कुचलकर मौत के घाट उतार दिया था। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में दहशत चरम पर है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इस हाथी को पकड़ा नहीं जाता या आबादी से दूर नहीं किया जाता, तब तक किसी भी वक्त और बड़ी घटना हो सकती है। उन्होंने वन विभाग और प्रशासन से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, ड्रोन या ट्रैकिंग टीम से निगरानी तेज करने और प्रभावित गांवों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यही है—आखिर कब जागेगा वन विभाग? और कब रुकेगा ‘मौत के इस टस्कर’ का आतंक?

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