अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉 कालाढूंगी रोड शराब दुकान में लाखों का गबन, 38.23 लाख का स्टॉक गायब; सवालों के घेरे में आबकारी निगरानी और दुकान प्रबंधन
हल्द्वानी। शहर के कालाढूंगी रोड स्थित एक शराब की दुकान में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान लाखों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता और गबन का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं इस पूरे प्रकरण ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था और दुकान प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता बीरेंद्र सिंह बिष्ट ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में शराब की दुकान उनके बड़े भाई महेन्द्र सिंह बिष्ट के नाम आवंटित थी, जिसकी देखरेख वह स्वयं कर रहे थे। दुकान में स्टॉक और बिक्री संचालन की जिम्मेदारी राजेन्द्र कुमार बधानी निवासी कोटाबाग, चेतन सिंह पडियार निवासी ब्यूराखाम, काठगोदाम तथा भास्कर जोशी निवासी चंपावत को सौंपी गई थी।
शिकायत के अनुसार वित्तीय वर्ष समाप्त होने के करीब दुकान के स्टॉक का भौतिक सत्यापन एक बाहरी व्यक्ति से कराया गया। इस दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर सामने आया। आरोप है कि संबंधित विक्रेताओं द्वारा रिकॉर्ड में बदलाव करने का प्रयास भी किया गया। दोबारा मिलान कराने पर दुकान में लगभग 38.23 लाख रुपये मूल्य का माल कम पाया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि एक विक्रेता के मोबाइल नंबर से जुड़े डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड की जांच के दौरान कई संदिग्ध लेनदेन सामने आए। आरोप है कि ग्राहकों से प्राप्त राशि का एक हिस्सा कंपनी के खाते में जमा किया गया, जबकि शेष रकम अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई। मामले में कुल 27.54 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया गया है।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
उठ रहे कई बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं—
यदि दुकान में लाखों रुपये के स्टॉक और बिक्री में गड़बड़ी हो रही थी तो आबकारी विभाग की नियमित निरीक्षण व्यवस्था कहां थी?
क्या वित्तीय वर्ष के दौरान विभागीय अधिकारियों द्वारा समय-समय पर स्टॉक सत्यापन और रिकॉर्ड जांच नहीं की गई?
यदि निरीक्षण हुए तो इतनी बड़ी कमी और कथित अनियमितता पकड़ में क्यों नहीं आई?
दूसरी ओर, दुकान स्वामी और प्रबंधन भी सवालों के घेरे में हैं। आखिर कई महीनों तक स्टॉक और बिक्री का नियमित मिलान क्यों नहीं किया गया?
कर्मचारियों को इतनी बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी सौंपने के बाद निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी?
जानकारों का मानना है कि यदि समय-समय पर स्टॉक का भौतिक सत्यापन और डिजिटल भुगतान का मिलान किया जाता तो मामला लाखों रुपये तक नहीं पहुंचता। ऐसे में प्रथम दृष्टया विभागीय निगरानी और प्रबंधन स्तर पर लापरवाही से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गबन में कौन-कौन जिम्मेदार है तथा कहीं निगरानी तंत्र की चूक ने इस पूरे प्रकरण को बढ़ावा तो नहीं दिया।
कालाढूंगी रोड शराब दुकान में लाखों का गबन, 38.23 लाख का स्टॉक गायब; सवालों के घेरे में आबकारी निगरानी और दुकान प्रबंधन
