तिकोनिया शराब अग्निकांड: करोड़ों की शराब राख, सरकार को लगा चुना: गैस सिलेंडर की मौजूदगी ने आबकारी विभाग की निगरानी पर खड़े किए बड़े सवाल

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉 तिकोनिया शराब दुकान अग्निकांड: करोड़ों की शराब राख, आखिर किसकी लापरवाही से सरकार को लगा चूना?
हल्द्वानी। तिकोनिया क्षेत्र स्थित अंग्रेजी एवं देशी शराब की दुकान में देर रात लगी भीषण आग ने करोड़ों रुपये मूल्य के शराब स्टॉक को राख में तब्दील कर दिया। आग की इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आबकारी विभाग की निगरानी और निरीक्षण प्रणाली को भी कटघरे में ला खड़ा किया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार देर रात दुकान से अचानक आग की लपटें उठने लगीं। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
दुकान के अंदर गैस सिलेंडर कैसे पहुंचा?
घटना के दौरान सबसे बड़ा खुलासा यह सामने आया कि शराब से भरी दुकान के अंदर गैस सिलेंडर भी रखा हुआ था। दमकल कर्मियों ने साहस दिखाते हुए सिलेंडर को सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे संभावित बड़े विस्फोट को टाल दिया गया।
अब सवाल उठ रहा है कि आखिर शराब जैसी ज्वलनशील सामग्री से भरी दुकान में गैस सिलेंडर रखने की अनुमति किसने दी? क्या यह सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन नहीं है?
कहां था आबकारी विभाग का निरीक्षण तंत्र?
शराब की दुकानें आबकारी विभाग के नियंत्रण और निगरानी में संचालित होती हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या हाल के दिनों में दुकान का कोई सुरक्षा निरीक्षण किया गया था? यदि किया गया था तो गैस सिलेंडर और अन्य संभावित सुरक्षा खामियां अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आईं?
सरकार को भी लगा बड़ा झटका
करोड़ों रुपये की शराब जलने के साथ-साथ सरकार को मिलने वाला आबकारी राजस्व भी प्रभावित हुआ है। ऐसे में यह केवल निजी नुकसान नहीं बल्कि सरकारी राजस्व की भी क्षति का मामला बन गया है।
शॉर्ट सर्किट बताकर खत्म नहीं होंगे सवाल
प्रारंभिक तौर पर आग का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, लेकिन कई सवाल अभी भी जवाब मांग रहे हैं। क्या विद्युत व्यवस्था की नियमित जांच हुई थी? क्या अग्निशमन उपकरण मौजूद और चालू हालत में थे? क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था?
जांच जरूरी, जिम्मेदारी तय हो
तिकोनिया शराब दुकान में हुई यह घटना केवल आग लगने की नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रबंधन की संभावित विफलता का मामला भी है। लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर इस हादसे के पीछे किसकी लापरवाही थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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