ओवररेटिंग का खुला खेल सुत्र, आबकारी विभाग सिर्फ कर रहा खानापूर्ति!” कालाढूंगी Road शराब दुकान पर कार्रवाई के नाम पर दिखावा, वर्षों से लुट रही जनता**

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉 **“ओवररेटिंग का खुला खेल, आबकारी विभाग सिर्फ कर रहा खानापूर्ति!”
कालाढूंगी Road शराब दुकान पर कार्रवाई के नाम पर दिखावा, वर्षों से लुट रही जनता**
हल्द्वानी। जिले में शराब दुकानों पर ओवररेटिंग का खेल कोई नया नहीं है, लेकिन आबकारी विभाग और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। कालाढूंगी रोड स्थित देसी मदिरा दुकान पर शुक्रवार को हुई कार्रवाई को लोग महज “खानापूर्ति” और “दिखावटी अभियान” बता रहे हैं।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देशों के बाद आबकारी विभाग हरकत में जरूर आया, लेकिन सवाल यह है कि जब महीनों से शराब दुकानों पर खुलेआम निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली की जा रही थी, तब विभाग आखिर किस नींद में सोया हुआ था?
सूत्रों के मुताबिक जिले की कई शराब दुकानों से लंबे समय से ओवररेटिंग की शिकायतें लगातार प्रशासन तक पहुंच रही थीं। आरोप है कि कई दुकानों पर शराब की प्रत्येक बोतल पर 10 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई केवल औपचारिक स्तर तक सीमित रही। सूत्रों का यह भी दावा है कि कुछ दुकानों पर विभागीय निरीक्षण की सूचना पहले ही पहुंच जाती है, जिससे मौके पर सब कुछ “सामान्य” दिखाने की तैयारी कर ली जाती है।
शुक्रवार को आबकारी विभाग की टीम ने कालाढूंगी रोड स्थित देसी शराब दुकान पर आकस्मिक निरीक्षण किया। जांच के दौरान स्टॉक, विक्रय रजिस्टर और मूल्य सूची की जांच की गई तथा ओवररेटिंग पाए जाने पर चालानी कार्रवाई की गई। मौके पर मौजूद कर्मचारियों को निर्धारित मूल्य पर ही शराब बेचने के निर्देश दिए गए और उपभोक्ताओं से अतिरिक्त पैसा न लेने की चेतावनी भी दी गई। निरीक्षण टीम में आबकारी अधिकारी मौजूद रहे।
सूत्रों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी शराब दुकान पर ओवररेटिंग पकड़ी गई हो। बावजूद इसके, विभागीय स्तर पर अब तक किसी बड़े लाइसेंस निरस्तीकरण या कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। यही कारण है कि शराब माफियाओं और ठेके संचालकों के हौसले बुलंद बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों और शराब खरीदने वाले उपभोक्ताओं का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ कैमरों और कागजों तक सीमित है। आरोप है कि जिले की अधिकांश शराब दुकानों पर वर्षों से तय रेट से अधिक वसूली की जा रही है। कई दुकानों पर “कोल्ड ड्रिंक शुल्क”, “सर्विस चार्ज” या “स्टॉक खत्म होने” जैसे बहाने बनाकर ग्राहकों से अतिरिक्त रकम ली जाती है, लेकिन आबकारी विभाग कभी सख्त कार्रवाई करता नजर नहीं आता।
लोगों का कहना है कि यदि विभाग वास्तव में गंभीर होता तो केवल चालान काटने तक सीमित न रहता, बल्कि शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित करने, भारी जुर्माना लगाने और जिम्मेदार कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराने जैसी कार्रवाई भी होती।
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि ओवररेटिंग का यह खेल बिना विभागीय मिलीभगत के संभव ही नहीं है। जनता का कहना है कि अधिकारी कभी-कभार छापेमारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि हर दिन हजारों उपभोक्ताओं की जेब काटी जा रही है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या जिला प्रशासन और आबकारी विभाग वास्तव में इस अवैध वसूली पर लगाम लगाएगा या फिर यह कार्रवाई भी कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद ठंडे बस्ते में चली जाएगी। जनता को इंतजार है कि “खानापूर्ति” से आगे बढ़कर आखिर कब होगी वास्तविक और कठोर कार्रवाई।

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