अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉
पीएसपी हॉस्पिटल में बुजुर्ग की मौत के बाद बवाल: परिजनों का आरोप- इलाज के नाम पर जमा कराए करीब 6.5 लाख रुपये, अब निष्पक्ष जांच की मांग
हल्द्वानी। शहर में तेजी से बढ़ रहे निजी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं और उपचार व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। रामपुर रोड स्थित पीएसपी हॉस्पिटल में उपचार के दौरान एक बुजुर्ग मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार बागेश्वर जनपद के मंडलसेरा निवासी 65 वर्षीय प्रेम गिरी पुत्र शिव गिरी को उपचार के लिए पीएसपी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि इलाज और ऑपरेशन के दौरान मरीज की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उनकी मौत हो गई।
परिजनों के अनुसार अस्पताल में उपचार के नाम पर करीब 6.5 लाख रुपये जमा कराए गए थे, लेकिन इसके बावजूद मरीज की जान नहीं बच सकी। परिजनों का कहना है कि इलाज की प्रक्रिया और मरीज की गंभीर स्थिति के संबंध में उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया। परिजनों ने मांग उठाई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से निजी अस्पतालों में उपचार के दौरान मरीजों की मौत के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, चिकित्सकीय व्यवस्था और निगरानी प्रणाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आधुनिक सुविधाओं और बेहतर इलाज के दावों के बीच मरीजों और उनके परिजनों को पारदर्शी व्यवस्था मिलना बेहद जरूरी है।
खास बात यह है कि जिस अस्पताल में यह घटना हुई है, उसका उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया गया था। ऐसे में घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब सवाल यह है कि निजी अस्पतालों की जांच और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाला स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है? क्या परिजनों की शिकायत पर निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह जांच के इंतजार में रह जाएगा?
फिलहाल मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले में विस्तृत बयान का इंतजार है।
