अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिन्दुखत्ता 👉 बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। सवा दो साल से लंबित अधिसूचना के मुद्दे पर 22वें दिन की पदयात्रा में ग्रामीणों ने सरकार को आर-पार के आंदोलन का संकेत दिया है।
सवा दो साल से अटकी अधिसूचना पर बिंदुखत्ता में उबाल, 22वें दिन ग्रामीणों ने दिखाई आर-पार की तैयारी
बिंदुखत्ता, 5 सितंबर। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। जिलास्तरीय वनाधिकार समिति द्वारा राजस्व ग्राम के दावे को सर्वसम्मति से स्वीकृति दिए जाने के सवा दो साल से अधिक समय बाद भी अधिसूचना जारी नहीं होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। 15 अगस्त से शुरू हुई घर-घर पदयात्रा के 22वें दिन शनिवार को सैकड़ों महिला-पुरुषों ने शामिल होकर सरकार से जल्द अधिसूचना जारी करने की मांग उठाई।

पदयात्रा शांतिनगर नब्बे फीट चौराहे से शुरू होकर टूटी पुलिया बाजार, शांतिनगर गब्दा और ढाकानी रोड होते हुए प्राइमरी स्कूल के समीप स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर पहुंची। यहां रात्रि पड़ाव के दौरान भजन-कीर्तन के साथ वनाधिकार कानून को लेकर ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा।
सीएम को फिर भेजा ज्ञापन, कई जनप्रतिनिधियों के पत्र लगाए
पदयात्रा के बाद ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी लालकुआं के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक और ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए जनप्रतिनिधियों के वे पत्र भी संलग्न किए गए हैं, जिनमें उन्होंने राजस्व ग्राम की मांग को समर्थन देते हुए अधिसूचना जारी करने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार जिलास्तरीय समिति में वन विभाग के डीएफओ समेत संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में राजस्व ग्राम के दावे को सर्वसम्मति से स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके बावजूद शासन स्तर पर अधिसूचना लंबित है। ज्ञापन के साथ सांसद अजय भट्ट, विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी, वन मंत्री सुबोध उनियाल, कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी समेत कई पूर्व विधायक एवं मंत्रियों के पत्र भी लगाए गए हैं।
स्थानीय कार्यकर्ताओं से पार्टियों पर दबाव बनाने की अपील
पदयात्रा के दौरान पूर्व सैनिक दीपक नेगी ने राजनीतिक दलों के स्थानीय कार्यकर्ताओं से अपनी-अपनी पार्टियों के भीतर बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग मजबूती से उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल सत्ता में आते-जाते रहे और बिंदुखत्ता की जनता को राजस्व ग्राम के नाम पर लगातार आश्वासन मिलते रहे, लेकिन अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
उन्होंने कहा कि 27 सितंबर की जनसभा के बाद लालकुआं तहसील तक प्रस्तावित विशाल रैली सरकार को यह स्पष्ट संदेश देगी कि बिंदुखत्ता की जनता अब एकजुट है और अपने अधिकार के लिए निर्णायक संघर्ष को तैयार है।
27 सितंबर को शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
आंदोलनकारियों ने 27 सितंबर को बड़ी संख्या में ग्रामीणों से शहीद स्मारक पहुंचने की अपील की है। पदयात्रा के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि सवा दो साल से स्वीकृति के बावजूद अधिसूचना जारी न होना क्षेत्र की जनता के साथ न्याय नहीं है। अब आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाकर सरकार पर दबाव बढ़ाया जाएगा।
पदयात्रा में वनाधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, बलवंत बिष्ट, नंदन बोरा, दीपक रौतेला, ममता बिष्ट, संध्या डालाकोटी, जीवन पांडे, दौलत सिंह कोरंगा, रमेश गोस्वामी, मनोज कोरंगा, कुंदन सिंह कोरंगा, कुंवर सिंह पवार, भूपेश जोशी, गोपाल सिंह मेहता, नारायण कोरंगा, तारादत्त जोशी, गजेंद्र सिंह, जीवन गुसाईं, वीरेंद्र कोरंगा, हरीश जोशी, बंशीधर जोशी, ईश्वर सिंह दानू, नरेश सूंठा, लीला चंदोला, भागीरथी कन्याल, खष्टी कन्याल, गुड्डी दानू, ममता रावत, रेखा कोरंगा, कविता पांडा, सपना कोरंगा, हंसी गड़िया, गीता कोरंगा, निर्मला भट्ट, गोविन्द गिरी, कुंवर सिंह जदौडा, भूपाल सिंह रावत, दीवान सिंह, पुष्कर भण्डारी, भवान सिंह कठयत, सुंदर सिंह धानिक सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

