डीएम ललित मोहन रयाल का निजी स्कूलों पर बड़ा शिकंजा, एवरग्रीन समेत 4 और स्कूलों को नोटिस

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉 मोटाहल्दु 👉 हल्द्वानी 👉 डीएम ललित मोहन रयाल का निजी स्कूलों पर बड़ा शिकंजा, एवरग्रीन समेत 4 और स्कूलों को नोटिस
नैनीताल जिले में 105 निजी विद्यालय प्रशासन के रडार पर, महंगी किताबें और अतिरिक्त फीस वसूली पर कार्रवाई तेज
नैनीताल। जनपद में निजी स्कूलों की मनमानी, महंगी किताबों की अनिवार्यता और अभिभावकों से अतिरिक्त शुल्क वसूली के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ा अभियान छेड़ दिया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर प्रशासन ने हल्दूचौड़ क्षेत्र के प्रतिष्ठित एवर ग्रीन सीनियर सेकेंडरी स्कूल समेत चार और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही जिले में नोटिस पाने वाले निजी विद्यालयों की संख्या बढ़कर 105 पहुंच गई है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल द्वारा की गई जांच में कई विद्यालयों पर एनसीईआरटी पुस्तकों के बजाय महंगी निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य कराने, अतिरिक्त शुल्क वसूलने और अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बनाने के आरोप सही पाए गए। प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ताजा कार्रवाई के तहत हल्दूचौड़ स्थित एवर ग्रीन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, लामाचौड़ का माउंट कार्मल सेरा स्कूल, देवलचौड़ का हैप्पी स्टेप्स स्कूल तथा भीमताल स्थित लेक्स इंटरनेशनल स्कूल को नोटिस जारी किए गए हैं। इससे पहले हल्द्वानी, लालकुआं, रामनगर, भवाली और भीमताल क्षेत्र के 101 निजी विद्यालय प्रशासन के निशाने पर आ चुके हैं।
जिला प्रशासन ने संबंधित विद्यालयों को 15 दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एनसीईआरटी आधारित पुस्तक सूची लागू करने, अतिरिक्त शुल्कों का समायोजन करने और स्कूल की वेबसाइट पर फीस एवं पुस्तक सूची सार्वजनिक करने के आदेश दिए गए हैं।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि आदेशों की अनदेखी की गई तो संबंधित विद्यालयों के खिलाफ मान्यता निलंबन अथवा निरस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्रशासन की इस सख्ती के बाद निजी विद्यालय संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
वहीं अभिभावकों ने जिला प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय से निजी स्कूल मनमानी फीस और महंगी किताबों के जरिए अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन की सख्ती से शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी और अभिभावकों को राहत मिलेगी।

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