डिजिटल होगी जनगणना-2027: उत्तराखंड में 25 अप्रैल से घर-घर शुरू होगा मकान सूचीकरण देखें वीडियो

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
डिजिटल होगी जनगणना-2027: उत्तराखंड में 25 अप्रैल से घर-घर शुरू होगा मकान सूचीकरण

मोबाइल एप, सीएमएमएस पोर्टल और सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा के साथ इस बार पूरी तरह बदलेगा जनगणना का स्वरूप
देहरादून | अजय अनेजा
देश में प्रस्तावित जनगणना-2027 को लेकर तैयारियां अब तेज हो गई हैं। उत्तराखंड में इसके पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य 25 अप्रैल 2026 से 24 मई 2026 तक किया जाएगा। इस बार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संपन्न कराई जाएगी, जिससे डाटा संग्रह, निगरानी और सत्यापन पहले के मुकाबले अधिक तेज और पारदर्शी होगा।


जनगणना के इतिहास पर नजर डालें तो भारत में पहली बार 1872 में जनगणना कराई गई थी, जबकि आज़ादी के बाद पहली जनगणना 1951 में हुई। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना नहीं हो सकी थी। ऐसे में अब होने वाली जनगणना-2027 देश की 16वीं और स्वतंत्र भारत की 8वीं जनगणना होगी।
इस बार जनगणना की पूरी कवायद तकनीक आधारित होगी। प्रगणक और पर्यवेक्षक मोबाइल एप के माध्यम से घर-घर जाकर डाटा संग्रह करेंगे, जबकि पूरे कार्य की निगरानी “सीएमएमएस पोर्टल” से की जाएगी। इससे सूचनाओं का रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सकेगा और पारंपरिक कागजी प्रक्रिया की तुलना में कार्य अधिक व्यवस्थित ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
उत्तराखंड में पहले चरण की औपचारिक शुरुआत से पहले 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक पूर्व सूचीकरण (Pre-listing) का कार्य भी चलाया जाएगा। इसके बाद 25 अप्रैल से 24 मई तक राज्यभर में मकानों और परिवारों का भौतिक सत्यापन एवं सूचीकरण किया जाएगा।
वहीं, दूसरे चरण में वास्तविक जनसंख्या गणना 9 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक कराई जाएगी। इस चरण में परिवार के सदस्यों, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और अन्य निर्धारित विवरणों का संकलन किया जाएगा।
जनगणना-2027 की एक और बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पहली बार सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा भी दी गई है। नागरिक 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 के बीच https://se.census.gov.in⁠� पोर्टल पर जाकर स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर अनिवार्य होगा। ओटीपी सत्यापन के बाद दर्ज की गई जानकारी को बदला नहीं जा सकेगा, इसलिए नागरिकों को सावधानीपूर्वक विवरण भरने की सलाह दी गई है।
राज्य में जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी लगभग पूरी कर ली गई हैं। जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों को मुख्य जनगणना अधिकारी बनाया गया है। इसके अलावा 23 मास्टर ट्रेनर्स और 555 फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, ताकि जमीनी स्तर पर कार्य सुचारु रूप से संपन्न कराया जा सके।
सरकार और प्रशासन का मानना है कि डिजिटल जनगणना से न सिर्फ प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, बल्कि भविष्य की योजनाओं, संसाधनों के वितरण और विकास कार्यों के लिए भी अधिक सटीक डाटा उपलब्ध हो सकेगा।
बाइट: दीपक गैरोला, सचिव जनगणना

 

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