अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉 गांधी-शास्त्री जयंती पर ग्राफिक एरा में स्वच्छता का संदेश
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी हल्द्वानी में गांधी-शास्त्री जयंती, जग्गी बांगर में चला स्वच्छता अभियान
हल्द्वानी। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी (GEHU), हल्द्वानी परिसर में गुरुवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में दोनों महापुरुषों के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम के साथ ही विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सामाजिक सरोकारों से जुड़ते हुए जग्गी बांगर क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ परिसर निदेशक डॉ. एम. सी. लोहनी ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण कर किया। इस दौरान छात्र-छात्राओं और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए डॉ. लोहनी ने कहा कि महात्मा गांधी के अहिंसा और स्वच्छता के विचार तथा लाल बहादुर शास्त्री की सादगी और ‘जय जवान, जय किसान’ का संदेश आज भी युवाओं के लिए प्रेरणादायी है।
उन्होंने कहा कि महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उनके विचारों को याद करने से नहीं, बल्कि उन्हें अपने आचरण और कर्मों में उतारने से होगी। उन्होंने युवाओं से स्वच्छ और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
जयंती समारोह के बाद विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई के स्वयंसेवकों और राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) कैडेट्स ने संयुक्त रूप से समीपस्थ जग्गी बांगर क्षेत्र में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया। अभियान के दौरान छात्र-छात्राओं ने श्रमदान करते हुए सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई की तथा जगह-जगह फैले प्लास्टिक कचरे को एकत्र कर उसका निस्तारण किया।
इस दौरान स्वयंसेवकों और कैडेट्स ने स्थानीय लोगों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। उन्होंने लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फेंकने, प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करने और अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने की अपील की।
विश्वविद्यालय के इस कार्यक्रम में जयंती समारोह के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी देखने को मिला। छात्र-छात्राओं ने स्वच्छता अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया कि महापुरुषों के आदर्शों को केवल स्मरण करने के बजाय उन्हें व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान है।

