हल्द्वानी-बरेली NH बना ‘मौत का हाईवे’! 24 घंटे में दो हादसे, आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार? गोरापड़ाव में 16 वर्षीय किशोर की मौत के अगले ही दिन फिर हादसा, स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा—ओवरलोड डंपर, अंधेरा और बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल।

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉

 

हल्द्वानी-बरेली NH बना ‘मौत का हाईवे’! 24 घंटे में दो हादसे, आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार? गोरापड़ाव में 16 वर्षीय किशोर की मौत के अगले ही दिन फिर हादसा, स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा—ओवरलोड डंपर, अंधेरा और बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल।

हल्द्वानी। हल्द्वानी-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-109) पर लगातार हो रहे सड़क हादसों ने एक बार फिर हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोरापड़ाव क्षेत्र में गुरुवार रात गलत दिशा से आ रहे एक ट्रक की चपेट में आने से 16 वर्षीय किशोर की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दूसरा किशोर गंभीर रूप से घायल होकर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। घटना के अगले ही दिन शुक्रवार को इसी हाईवे पर एक और हादसा हो गया, जिससे स्थानीय लोगों का गुस्सा और बढ़ गया।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह हादसे महज संयोग नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही का परिणाम हैं। उनका कहना है कि रात के समय ओवरलोड डंपरों की आवाजाही लगातार जारी रहती है, लेकिन प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन भारी वाहनों को किसका संरक्षण प्राप्त है और इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

लोगों ने हाईवे की कई गंभीर खामियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। गोरापड़ाव से लालकुआं तक कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। कई यू-टर्न और कट बिना पर्याप्त योजना के बनाए गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। भारी आबादी वाले क्षेत्रों में चेतावनी संकेतक और स्पीड लिमिट बोर्डों का अभाव है। जहां स्पीड कैमरे लगे हैं, वहां भी उनकी उपयोगिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो यह मार्ग लोगों के लिए “मौत का द्वार” बना रहेगा। उन्होंने मांग की है कि ओवरलोड और नियमों का उल्लंघन करने वाले डंपरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए, बंद स्ट्रीट लाइटों को तत्काल चालू कराया जाए, खतरनाक कटों की समीक्षा हो, चेतावनी बोर्ड और स्पीड लिमिट संकेत लगाए जाएं तथा संवेदनशील क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी की व्यवस्था की जाए।

साथ ही लोगों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सके।

 

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