हल्द्वानी-लालकुआं-हल्दूचौड़-बिंदुखत्ता में मौत के मुहाने पर आबादी! अमेजॉन गोदाम अग्निकांड ने खोली सुरक्षा की पोल, कबाड़ गोदामों और संदिग्ध किराएदारों पर कब चलेगा अभियान?

ख़बर शेयर करें

अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी  👉

हल्द्वानी की दर्दनाक आग ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल! कबाड़ गोदाम, अवैध भंडारण और बिना सत्यापन किराएदार बने खतरा, प्रशासन कब जागेगा?

हल्द्वानी। हल्द्वानी में शुक्रवार देर रात एक गोदाम में लगी भीषण आग ने दो युवकों की जान ले ली। आग इतनी भयावह थी कि गोदाम में काम कर रहे दो कर्मचारी धुएं और आग की चपेट में आ गए तथा उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने शहर में संचालित गोदामों, कबाड़ भंडारण केंद्रों और आबादी के बीच चल रहे ज्वलनशील सामग्री के कारोबार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस के अनुसार रात करीब 11:50 बजे डायल-112 के माध्यम से शीतल होटल के सामने स्थित गोदाम में आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस, अग्निशमन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। आग पर काबू पाने के बाद अंदर काम कर रहे दो कर्मचारियों की मौत की पुष्टि हुई। मृतकों की पहचान नरेंद्र प्रसाद (35) निवासी गोलापार और अमित आर्य (25) निवासी रामपुर रोड, हल्द्वानी के रूप में हुई है। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

इस घटना के बाद हल्द्वानी, लालकुआं, हल्दूचौड़ और बिंदुखत्ता क्षेत्र में संचालित कबाड़ गोदामों और अन्य भंडारण केंद्रों को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई स्थानों पर घनी आबादी के बीच भारी मात्रा में प्लास्टिक, रबर, कागज और अन्य ज्वलनशील सामग्री जमा की जाती है, लेकिन फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई देते। सवाल यह भी उठ रहा है कि ऐसे प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण, लाइसेंस सत्यापन और सुरक्षा ऑडिट आखिर कितनी गंभीरता से किया जाता है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन को केवल हादसे के बाद नहीं, बल्कि पहले से ही ऐसे गोदामों, कबाड़ भंडारण स्थलों और व्यावसायिक परिसरों की जांच करनी चाहिए। यदि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने परिजनों को इस तरह न खोना पड़े।

इसके साथ ही बाहरी व्यक्तियों और किराएदारों के सत्यापन का मुद्दा भी सामने आया है। लोगों का कहना है कि कई इलाकों में बाहरी लोग किराए पर रह रहे हैं या विभिन्न गोदामों में काम कर रहे हैं, लेकिन उनके पुलिस सत्यापन की स्थिति स्पष्ट नहीं है। नागरिकों का मानना है कि किराएदार सत्यापन अभियान को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए, जिससे चोरी, लूट, नशा तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और नगर निकायों से मांग की है कि हल्द्वानी, लालकुआं, हल्दूचौड़ और बिंदुखत्ता में विशेष अभियान चलाकर सभी गोदामों, कबाड़ भंडारण केंद्रों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की जाए। फायर सेफ्टी उपकरण, आपातकालीन निकास, लाइसेंस, पंजीकरण और कर्मचारियों के सत्यापन की पड़ताल की जाए तथा नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।

लोगों का कहना है कि हल्द्वानी की यह दर्दनाक घटना एक चेतावनी है। यदि अब भी सुरक्षा मानकों, सत्यापन व्यवस्था और नियमित निरीक्षण को गंभीरता से नहीं लिया गया तो भविष्य में इससे भी बड़े हादसे हो सकते हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो और किसी भी लापरवाही की कीमत लोगों को अपनी जान देकर न चुकानी पड़े।

error: Content is protected !!