लालकुआं में जल संकट पर सवाल! देखिए जिलाधिकारी महोदय जल जीवन मिशन फेल, जल संस्थान के अधिकारी गहरी नींद में… 30 साल पुराने नल तक उखाड़ ले गए, जल संस्थान वाले:अधिकारी मस्त जनता त्रस्त

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉
लालकुआं में जल संकट पर सवाल! जल जीवन मिशन फेल, जल संस्थान के अधिकारी गहरी नींद में… 30 साल पुराने प्याऊ तक उखाड़ ले गए, अधिकारी मस्त जनता त्रस्त
लालकुआं। सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के दावों के बीच लालकुआं क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां एक ओर घर-घर पानी पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई क्षेत्रों में लोग आज भी पानी की बूंद-बूंद के लिए परेशान हैं।
लोगों का कहना है कि जल संस्थान लालकुआं की लापरवाही के चलते कई जगह सरकारी नल सूखे पड़े हैं और पानी की टंकियां केवल शोपीस बनकर रह गई हैं। नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं होने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लालकुआं में आने-जाने वाले राहगीरों की प्यास बुझाने के लिए लगाया गया सरकारी प्याऊ (नल), जो पिछले करीब 30 वर्षों से लोगों की सेवा कर रहा था, उसे भी जल संस्थान लालकुआं के अधिकारियों द्वारा उखाड़कर ले जाया गया। लोगों का कहना है कि यह प्याऊ गर्मी के दिनों में राहगीरों, मजदूरों और आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत का साधन था, लेकिन अब इसके हटने से लोगों में नाराजगी है।
जनता सवाल उठा रही है कि आखिर वर्षों से लोगों की सेवा कर रहे इस पानी के नल को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यही वह “अच्छे दिन” हैं जिनके सपने जनता ने देखे थे, जहां मूलभूत सुविधा पानी के लिए भी लोगों को परेशान होना पड़े?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जल संस्थान लालकुआं के अधिकारी जनता की समस्याओं से बेखबर होकर गहरी नींद में हैं। कभी पानी की आपूर्ति की जाती है तो कभी बंद कर दी जाती है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्था सुधारने के बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं।
लोगों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी नैनीताल से मांग की है कि पूरे मामले का संज्ञान लेकर जल संस्थान लालकुआं की कार्यप्रणाली की जांच कराई जाए और जनता को नियमित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ ही हटाए गए सरकारी प्याऊ को लेकर भी उचित कार्रवाई की जाए।
लालकुआं की जनता का सवाल साफ है— अधिकारी मस्त, जनता त्रस्त… आखिर कब खुलेगी जल संस्थान लालकुआं के अधिकारियों की नींद?
अब देखना होगा कि जिलाधिकारी महोदय इस मामले में कब कार्रवाई करते हैं।

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