अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉 मोटाहल्दु 👉
प्रबंधन की मनमर्जी के चलते धरना-प्रदर्शन को मजबूर श्रमिक, 14 सूत्रीय मांगों पर फैक्ट्री गेट पर उबाल
लालकुआं। मोटाहल्दू स्थित मदरसन कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आ गया, जब करीब 200 श्रमिक सुबह 6 बजे से कंपनी गेट के बाहर हड़ताल पर बैठ गए। अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
आंदोलनरत कर्मचारियों ने प्रबंधन पर मनमानी और शोषण के गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उनसे निर्धारित समय से अधिक काम लिया जा रहा है, लेकिन उसके अनुरूप वेतन नहीं दिया जा रहा। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपये किए जाने और शिफ्ट की अवधि 8 घंटे तय करने की मांग शामिल रही
करीब 300 महिला और पुरुष कर्मचारियों ने हाल ही में निकाले गए साथियों की पुनः नियुक्ति की मांग को भी जोर-शोर से उठाया। कर्मचारियों का कहना है कि छंटनी के कारण उनमें असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। इसके अलावा फैक्ट्री बसों के खराब मेंटेनेंस, चालकों के अनुचित व्यवहार और ‘नो ब्रेक सिस्टम’ जैसी व्यवस्थाओं को लेकर भी उन्होंने कड़ा विरोध जताया।
मौके पर प्रशासन की मौजूदगी में कंपनी प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच सुलह वार्ता कराई गई। वार्ता के दौरान 14 में से 12 मांगों पर सहमति बन गई, लेकिन वेतन से जुड़ी मांग पर सहमति नहीं बन सकी। इसी मुद्दे को लेकर कुछ कर्मचारी अड़े रहे, जबकि 50 से अधिक कर्मचारी ड्यूटी पर लौट गए और कुछ अपने घरों को वापस चले गए। इसके बावजूद 100 से अधिक कर्मचारी फैक्ट्री गेट पर डटे रहे।
दोपहर तक दोबारा कोई ठोस वार्ता नहीं हो सकी। इस बीच प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कुछ स्थानीय युवा और जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे। काफी देर तक नारेबाजी और हंगामे के बाद धीरे-धीरे कर्मचारी अपने घरों को लौट गए।
इस दौरान एसपी सिटी मनोज कत्याल, उप जिलाधिकारी रेखा कोहली, कोतवाली प्रभारी ब्रजमोहन सिंह राणा और क्षेत्रीय विधायक डॉ. मोहन बिष्ट ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने के प्रयास किए। हालांकि कुछ कर्मचारी विधायक के सामने ही नारेबाजी करते रहे, जिसके चलते उन्हें बिना समाधान के लौटना पड़ा।
वहीं कंपनी के एचआर हेड सुभाष तिवारी ने बताया कि कर्मचारियों की 14 में से 12 मांगें मान ली गई हैं और अधिकांश कर्मचारी काम पर लौट चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेतन शासनादेश के अनुरूप दिया जा रहा है और सरकार की ओर से नया आदेश आने पर वेतनमान में संशोधन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कर्मचारियों से कंपनी और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए काम पर लौटने की अपील की।
फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन वेतन को लेकर असंतोष बरकरार रहने से भविष्य में फिर से विवाद गहराने की आशंका बनी हुई है।







