ऑनलाइन गेमिंग के जाल में बुझ गई एक और जिंदगी: कर्ज, दबाव और मौत ने छीना घर का इकलौता सहारा

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 ऑनलाइन गेमिंग के जाल में बुझ गई एक और जिंदगी: कर्ज, दबाव और मौत ने छीना घर का इकलौता सहारा
“तीन हजार के ऑनलाइन कर्ज ने ले ली 17 वर्षीय छात्र की जान, परिवार ने युवक पर लगाया मानसिक प्रताड़ना और दबाव बनाने का आरोप”
कालाढूंगी/कोटाबाग।
मोबाइल स्क्रीन पर शुरू हुआ ऑनलाइन गेम का शौक आखिरकार एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया। कोटाबाग क्षेत्र के एक 17 वर्षीय छात्र ने जहरीला पदार्थ गटक कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। परिजनों ने एक युवक पर लगातार पैसे मांगकर मानसिक दबाव बनाने और आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है।
मृतक छात्र की पहचान जगदीश बिष्ट पुत्र धन सिंह बिष्ट निवासी थपालियागांजा, कोटाबाग के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि जगदीश को ऑनलाइन गेम खेलने की लत लग गई थी और इसी दौरान उसने गेम में पैसे हार दिए थे। परिवार के अनुसार उसने एक युवक से करीब तीन हजार रुपये उधार लिए थे, जिसे लौटाने को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा था।
गेम की लत बनी मौत की वजह
परिजनों के मुताबिक जगदीश को मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलने की आदत थी। धीरे-धीरे वह इस खेल में पैसे लगाने लगा। शुरुआत में छोटी रकम हारने के बाद उसने उधार लेकर गेम खेलना शुरू किया। बताया जा रहा है कि हार बढ़ती गई और कर्ज का बोझ भी।
बुधवार सुबह करीब सात बजे जगदीश ने घर के पास ही जहरीला पदार्थ खा लिया। उसकी हालत बिगड़ने लगी तो परिजन आनन-फानन में उसे सीएचसी कोटाबाग लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद उसे हायर सेंटर रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मौत से पहले वीडियो में बयां किया दर्द
घटना के बाद सामने आए वीडियो ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि मौत से पहले जगदीश ने वीडियो बनाकर अपनी परेशानी बताई थी। वीडियो में उसने एक युवक का नाम लेते हुए कहा कि उसने उससे तीन हजार रुपये उधार लिए थे जो ऑनलाइन गेम में हार गया।
मृतक ने वीडियो में यह भी आरोप लगाया कि युवक लगातार पैसे लौटाने का दबाव बना रहा था और धमकी दे रहा था। परिवार का आरोप है कि इसी मानसिक तनाव के कारण जगदीश ने यह खौफनाक कदम उठाया।
परिजनों का फूटा गुस्सा, शव रखकर किया प्रदर्शन
पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव पहुंचा तो परिवार और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजन शव को एंबुलेंस में रखकर कालाढूंगी कोतवाली पहुंचे और कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
मृतक के पिता धन सिंह बिष्ट ने पुलिस को तहरीर सौंपते हुए आरोप लगाया कि उनके बेटे को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और पैसे के लिए लगातार दबाव बनाया गया। उन्होंने आरोपी युवक की गिरफ्तारी की मांग की।
पुलिस बोली— हर एंगल से जांच जारी
मामले को लेकर पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल फोन, वीडियो और डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में ऑनलाइन गेमिंग और पैसों के लेनदेन की बात सामने आई है। वहीं जिस युवक पर आरोप लगाए गए हैं, उसका बयान भी दर्ज किया जा रहा है।
समाज के लिए बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ रही ऑनलाइन गेमिंग की खतरनाक लत का डरावना चेहरा भी है। मोबाइल गेम अब बच्चों और किशोरों को सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि आर्थिक और मानसिक जाल में फंसा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। छोटी उम्र में डिजिटल लत और पैसों का लालच बच्चों को मानसिक तनाव की ओर धकेल रहा है।
जगदीश की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ऑनलाइन गेमिंग के इस अंधे खेल पर लगाम कब लगेगी, ताकि किसी और घर का चिराग यूं ना बुझे 

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