ऊधमसिंह नगर में ज़हर का खेल! बाजपुर के बाद दिनेशपुर में नकली आयुर्वेदिक दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
ऊधमसिंह नगर में ज़हर का खेल! बाजपुर के बाद दिनेशपुर में नकली आयुर्वेदिक दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

छापे में भारी मात्रा में दवाएं, अंग्रेजी दवाओं का स्टॉक, मशीनें, अवैध हथियार और हिरण के सींग बरामद; जांच की जद में पूरा नेटवर्क
दिनेशपुर/ऊधमसिंह नगर। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में नकली और मिलावटी दवाओं का काला कारोबार लगातार बेनकाब हो रहा है। बाजपुर में एसटीएफ द्वारा नकली अंग्रेजी दवाओं की फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद अब दिनेशपुर के गूलरभोज क्षेत्र में आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर कथित मिलावट का बड़ा खुलासा हुआ है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने सरकारी निगरानी व्यवस्था और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आयुष विभाग के निर्देश और जिला प्रशासन की अनुमति के बाद गठित संयुक्त टीम ने दिनेशपुर के मोतीपुर वार्ड-दो स्थित स्वरूप सिंह के परिसर में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में आयुर्वेदिक पाउडर, मधुमेह समेत विभिन्न रोगों में प्रयुक्त अंग्रेजी दवाएं, दवा बनाने और पीसने की मशीनें, तैयार औषधियां, एक अवैध हथियार तथा हिरण के सींग बरामद किए गए। इस बरामदगी से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित रूप से आयुर्वेदिक दवाओं में अंग्रेजी दवाओं को पीसकर मिलाया जाता था और तैयार उत्पादों की देश-विदेश तक सप्लाई की जाती थी। हालांकि इस दावे की अंतिम पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि इतने बड़े स्तर पर दवा निर्माण और सप्लाई का काम चल रहा था तो संबंधित विभागों को इसकी भनक वर्षों तक क्यों नहीं लगी? क्या निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित थे? क्या लाइसेंस, गुणवत्ता जांच और बाजार निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी थी?
कुछ ही समय में बाजपुर और दिनेशपुर में दो बड़े मामलों का खुलासा यह संकेत देता है कि जिले में नकली और मिलावटी दवाओं का संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो हजारों लोगों की सेहत खतरे में पड़ सकती थी।
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. आलोक कुमार शुक्ला ने कहा कि आयुर्वेद जैसी विश्वसनीय चिकित्सा पद्धति के नाम पर किसी भी तरह की मिलावट और धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बरामद अंग्रेजी दवाओं को औषधि निरीक्षक ने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है, जबकि पुलिस अवैध हथियार और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम से जुड़े मामलों की भी जांच कर रही है।
अब पूरे जिले की निगाहें इस जांच पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई केवल फैक्ट्री संचालक तक सीमित रहेगी या फिर उन लोगों तक भी पहुंचेगी, जिनकी कथित लापरवाही या संरक्षण में यह अवैध कारोबार वर्षों तक फलता-फूलता रहा। यदि जांच निष्पक्ष और गहराई से हुई तो आने वाले दिनों में कई बड़े नाम और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।

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