अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 रुद्रपुर 👉 किच्छा 👉
खान फार्म भूमि विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन: एसडीएम किच्छा और कोतवाल रवि सैनी तलब, पूछा– सिविल कोर्ट के स्टे के बावजूद धारा 164 क्यों?
6 जुलाई को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होंगे एसडीएम किच्छा और थाना प्रभारी रवि सैनी • हाईकोर्ट का सख्त निर्देश– सिविल कोर्ट की अंतरिम निषेधाज्ञा का हर हाल में हो पालन, पुलिस किसी भी पक्ष को आदेश तोड़ने न दे।
रिपोर्ट: अजय अनेजा
नैनीताल/किच्छा। ऊधम सिंह नगर के बहुचर्चित खान फार्म भूमि विवाद मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि जब विवादित भूमि को लेकर सक्षम सिविल न्यायालय की अंतरिम निषेधाज्ञा (स्टे) पहले से प्रभावी थी, तब उसी संपत्ति को लेकर बीएनएसएस की धारा 164 के तहत कार्यवाही किस आधार पर शुरू की गई।
इसी सवाल का जवाब जानने के लिए हाईकोर्ट ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) किच्छा और किच्छा कोतवाली प्रभारी रवि सैनी को 6 जुलाई 2026 को सुबह 10:30 बजे न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने दोनों अधिकारियों से स्पष्ट जवाब मांगा है कि सिविल कोर्ट के प्रभावी आदेश के बावजूद नई कार्यवाही शुरू करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता सिकंदर आलम खान की ओर से दायर रिट याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रतिवादी पक्ष विवादित भूमि पर जबरन हस्तक्षेप कर रहा है। साथ ही याचिकाकर्ता, उसके कर्मचारियों और परिसर में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को खतरा बताया गया। याचिका में पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा निजी प्रतिवादियों को कानून अपने हाथ में लेने से रोकने की मांग की गई।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 11 जून 2026 को किच्छा के सिविल जज द्वारा पारित अंतरिम निषेधाज्ञा में प्रतिवादियों को विवादित भूमि पर वादियों के शांतिपूर्ण कब्जे में हस्तक्षेप करने, कृषि कार्यों में बाधा डालने तथा उन्हें जबरन बेदखल करने से स्पष्ट रूप से रोका गया था। यह आदेश आज भी पूरी तरह प्रभावी है और न तो निरस्त किया गया है और न ही उसमें कोई संशोधन हुआ है।
हाईकोर्ट की दो-टूक टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि सिविल न्यायालय की अंतरिम निषेधाज्ञा पूरी तरह प्रभावी और बाध्यकारी है। अदालत ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखें और किसी भी पक्ष को सिविल कोर्ट के आदेश का उल्लंघन न करने दें।
अदालत ने प्रथम दृष्टया यह भी माना कि अंतरिम निषेधाज्ञा लागू होने के लगभग 20 दिन बाद उसी भूमि को लेकर बीएनएसएस की धारा 164 के तहत कार्यवाही शुरू किया जाना स्पष्टीकरण की मांग करता है। यही कारण है कि एसडीएम किच्छा और कोतवाली प्रभारी रवि सैनी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया है।
अब 6 जुलाई की सुनवाई पर टिकी निगाहें
हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब पूरे मामले की निगाहें 6 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत में एसडीएम किच्छा और थाना प्रभारी को यह बताना होगा कि सिविल कोर्ट के प्रभावी स्टे के बावजूद धारा 164 के तहत कार्यवाही क्यों शुरू की गई। माना जा रहा है कि इस सुनवाई के बाद मामले में आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।
फिलहाल हाईकोर्ट का स्पष्ट संदेश है— सिविल कोर्ट के आदेश सर्वोपरि हैं और उनका उल्लंघन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
