अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 “धामी जी देखिए देवभूमि का हाल! लालकुआं में जल जीवन मिशन बना मजाक, सूखे पड़े नल और शोपीस बनी टंकियां, अधिकारी मस्त-जनता त्रस्त”
लालकुआं क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ अब लोगों के लिए मजाक बनकर रह गई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई इलाकों में आज भी लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। कहीं नल बिना कनेक्शन के लगे हैं तो कहीं पानी की टंकियां केवल शोपीस बनकर खड़ी हैं। भीषण गर्मी के बीच जनता पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान है, लेकिन जल संस्थान और जल निगम के अधिकारी गहरी नींद में दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई गांवों और बस्तियों में पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा पड़ा है। जिन जगहों पर नल लगाए गए हैं वहां महीनों से पानी नहीं आया। कई स्थानों पर टंकियां बनकर तैयार हैं, लेकिन उनमें पानी सप्लाई की कोई व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय केवल आश्वासन दे रहे हैं।
जनता का कहना है कि गर्मी के मौसम में हालात बद से बदतर हो चुके हैं। महिलाओं और बुजुर्गों को दूर-दराज से पानी ढोना पड़ रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि जल संस्थान और जल निगम के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। करोड़ों की योजनाएं धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami से मामले का संज्ञान लेने की मांग करते हुए कहा है कि आखिर देवभूमि उत्तराखंड में जनता को पीने का पानी तक क्यों नसीब नहीं हो पा रहा है। लोगों ने मांग की कि जल जीवन मिशन के कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इस पूरे मामले ने जल जीवन मिशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता का साफ कहना है— “अधिकारी मस्त हैं और जनता त्रस्त।”
धामी जी देखिए देवभूमि का हाल! लालकुआं में जल जीवन मिशन बना मजाक, सूखे पड़े नल और शोपीस बनी टंकियां, अधिकारी मस्त-जनता त्रस्त”
